नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) सरकार लोकसभा में एक विधेयक पेश करने वाली है ताकि भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के दायरे को बढ़ाया जा सके और इसके कानूनी ढांचे को बदलती जरूरतों के हिसाब से ढाला जा सके।
‘भारतीय सांख्यिकीय संस्थान विधेयक, 2026’ का उद्देश्य संस्थान को एक ‘बॉडी कॉर्पोरेट’ के तौर पर शामिल करना है, ताकि इसके कामकाज को बेहतर बनाया जा सके, अकादमिक उत्कृष्टता और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा सके और इसे सांख्यिकीय और उससे जुड़े क्षेत्रों की उभरती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।
विधेयक के मुताबिक, भारत के राष्ट्रपति संस्थान के विजिटर होंगे और इसमें शासी मंडल (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) का प्रावधान होगा, जो इसकी नीति बनाने वाली और उसे लागू करने वाली मुख्य संस्था होगी।
बोर्ड की अध्यक्षता एक अध्यक्ष करेंगे, जो शिक्षा, उद्योग, लोक नीति और सांख्यिकीय विज्ञान के क्षेत्र से कोई जाने-माने व्यक्ति होंगे।
विधेयक में कहा गया है कि बोर्ड केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह होगा।
‘भारतीय सांख्यिकीय संस्थान अधिनियम, 1959’ के माध्यम से संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया था और इसे सांख्यिकी में डिग्री और डिप्लोमा देने का अधिकार दिया था।
1995 में इस अधिनियम में संशोधन करके संस्थान को सांख्यिकी, गणित, मात्रात्मक अर्थशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और सांख्यिकी से जुड़े ऐसे अन्य विषयों में डिग्री और डिप्लोमा देने का अधिकार दिया गया, जिन्हें संस्थान समय-समय पर तय कर सकता है।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा