भाजपा ने बेंगलुरु में अपशिष्ट प्रबंधन में 39 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया
भाजपा ने बेंगलुरु में अपशिष्ट प्रबंधन में 39 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया
बेंगलुरु, 10 जून (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बेंगलुरु के अपशिष्ट प्रबंधन में 39,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया है और एक निजी कंपनी को दी गई दीर्घकालिक कचरा प्रसंस्करण निविदा के जरिये 10,000 करोड़ रुपये की रिश्वत प्राप्त की है।
बाद में भाजपा नेता अशोक ने राज्यपाल थावर चंद गहलोत को एक ज्ञापन सौंपकर निविदा प्रक्रिया की जांच की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी को 35 वर्षों के लिए बहुत अधिक दरों पर अनुबंध दिया गया था, जिससे सरकारी खजाने पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ा है।
अशोक ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘देश के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब कचरे के नाम पर 35,000 करोड़ रुपये की इतनी बड़ी लूट हुई है।’’
उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज भी जारी किये।
अशोक ने आरोप लगाया कि कचरे के प्रसंस्करण और निपटान की निविदा दिल्ली की एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशंस लिमिटेड या उसकी मूल कंपनी रामकी को 30 वर्षों के लिए दी गई है, जिसमें पांच वर्ष के विस्तार का प्रावधान शामिल है, जिससे कुल अनुबंध अवधि 35 वर्ष हो जाती है।
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु वर्तमान में कचरा संग्रहण और परिवहन पर 514 करोड़ रुपये वार्षिक, प्रसंस्करण और निपटान पर 380 करोड़ रुपये तथा नगर निकाय के 11 हजार कर्मियों के वेतन पर 444 करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे कुल वार्षिक व्यय 1,344 करोड़ रुपये हो जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक वृहद बेंगलुरु क्षेत्र (जीबीए) में कचरा प्रबंधन का कार्य स्थानीय ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा था, लेकिन 39,000 करोड़ रुपये की नयी निविदा दिल्ली की एक कंपनी को दे दी गई है, जिसमें 10,000 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत शामिल है।
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि निविदा प्रक्रिया के तहत आवश्यक अनिवार्य समाचारपत्र विज्ञापन जारी नहीं किए गए थे।
वित्त विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियों का उल्लेख करते हुए अशोक ने कहा कि एक ही कंपनी को दोनों पैकेज दिए जाने, 30 वर्ष की अनुबंध अवधि तथा पांच प्रतिशत वृद्धि के प्रावधान को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं।
अशोक ने दावा किया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव रितेश कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रस्ताव में कमियों की ओर ध्यान दिलाया था।
ठेकेदार के चयन में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विश्व बैंक ने धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन के कारण रामकी को काली सूची में डाल दिया था तथा यह भी बताया कि कंपनी का अनुबंध 2016 में बीबीएमपी द्वारा रद्द कर दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने निविदा उसी कंपनी को दे दी।
अशोक ने दावा किया कि यह प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के पद छोड़ने से पहले मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर कर लिया गया था और कई मंत्रियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस सरकार कचरे से भी पैसा कमाने की कोशिश कर रही है। पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार से भरी है।’’ उन्होंने निविदा को तुरंत रद्द करने की मांग की।
इस बीच अशोक ने लोक भवन में राज्यपाल गहलोत से मुलाकात की और निविदा प्रक्रिया की जांच की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
बाद में अशोक ने इस संबंध में राज्य के लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई।
भाषा
देवेंद्र रंजन
रंजन

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