भाजपा ने शबरिमला पर रुख को लेकर एलडीएफ और यूडीएफ की आलोचना की
भाजपा ने शबरिमला पर रुख को लेकर एलडीएफ और यूडीएफ की आलोचना की
तिरुवनंतपुरम, सात अप्रैल (भाषा) केरल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों की शबरिमला मुद्दे पर रुख की मंगलवार को आलोचना करते हुए उन पर पहाड़ी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रुख से पलट जाने का आरोप लगाया।
केरल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने यहां नीमोम में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के रुख में कथित बदलाव के पीछे के कारणों को जानना चाहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अतीत में शबरिमला मंदिर में युवतियों के प्रवेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ 3,000 से अधिक मामले दर्ज किए थे और प्राधिकारियों से इन मामलों को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया।
चंद्रशेखर की ये टिप्पणी उस दिन आई जब भारत के उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने शबरिमला सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई शुरू की।
चंद्रशेखर ने दावा किया, ‘‘भाजपा एकमात्र राजनीतिक दल है जिसने शबरिमला श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा के लिए लगातार स्थिर रुख अपनाया है।’
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू किये जाने के साथ, केरल के लोगों को महिलाओं के प्रवेश पर एलडीएफ और यूडीएफ दोनों द्वारा पहले अपनाए गए रुख को याद रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वाम सरकार के पास अभी भी अय्यप्पा श्रद्धालुओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेकर अपनी गलती सुधारने का मौका है।
दोनों मोर्चों द्वारा भगवान अय्यप्पा मंदिर मुद्दे पर अपना रुख बदलने का आरोप लगाते हुए, भाजपा नेता ने कहा कि वे उनके इस बदले हुए रुख से ‘खुश’ हैं और उनसे इस बदलाव के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने का आग्रह किया।
इस मामले की सुनवाई कर रही संविधान पीठ में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह, न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।
सुनवाई से पहले, केंद्र ने लिखित अनुरोध दाखिल करके उच्चतम न्यायालय से शबरिमला मंदिर में मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक को बरकरार रखने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार ने कहा कि यह मुद्दा धार्मिक आस्था और संप्रदाय की स्वायत्तता के दायरे में आता है और न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।
भाषा अमित माधव
माधव

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