सोमनाथ पर झूठ फैला रही है भाजपा, नेहरू ने गांधी और पटेल की नीति का पालन किया था: कांग्रेस
सोमनाथ पर झूठ फैला रही है भाजपा, नेहरू ने गांधी और पटेल की नीति का पालन किया था: कांग्रेस
नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने सोमनाथ मंदिर और पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दावे को झूठ करार देते हुए बुधवार को कहा कि नेहरू ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल की सहमति से तय उस नीति का पालन किया था कि धर्मस्थल के निर्माण में सरकारी पैसे का उपयोग नहीं होना चाहिए।
मुख्य विपक्षी दल ने यह सवाल भी किया है कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि क्या राम मंदिर के शिलान्यास के समय तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और इसके उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को क्या इसलिए नहीं आमंत्रित किया गया कि कि वे दलित और आदिवासी समुदाय से आते हैं?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पार्टी नेता पीयूष बबेले का एक वीडियो ‘एक्स’ पर साझा किया था जिसमें भाजपा के आरोपों पर विस्तृत जवाब दिया गया है।
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सोमनाथ मंदिर को अतीत में महमूद गजनी और अलाउद्दीन खिलजी ने लूटा था, लेकिन स्वतंत्र भारत में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी।
कांग्रेस नेता बबेले ने इसके जवाब में कहा, ‘‘भाजपा और सुधांशु त्रिवेदी पंडित नेहरू और सोमनाथ मंदिर को लेकर अर्धसत्य परोस रहे हैं, झूठ फैला रहे हैं। वे नेहरू जी के कुछ चुनिंदा पत्र को निकालते हैं और आगे एवं पीछे के पत्रों को अलग कर देते हैं ताकि झूठ सच लगने लगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘28 नवंबर, 1947 को भी दिल्ली में अपनी प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि जूनागढ़ सरकार सरकारी ख़ज़ाने से सोमनाथ मंदिर का निर्माण नहीं कर सकती। जब गांधीजी ने सरदार पटेल से पूछा कि क्या आप सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए सरकारी ख़ज़ाने से कुछ पैसा दे रहे हैं, तो पटेल ने कहा था कि ‘जब तक मैं ज़िंदा हूं सरकारी ख़ज़ाने से एक पैसा सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए नहीं दिया जाएगा। हिन्दू समाज चंदा करके मंदिर का निर्माण कर सकता है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकारी धन से मंदिर का निर्माण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की नीति और भारतीय संविधान के प्रावधानों के प्रतिकूल था। पंडित नेहरू इसी नीति का पालन करते हुए मंदिर के निर्माण में सरकारी धन के उपयोग का विरोध कर रहे थे।’’
बबेले ने कहा है, ‘‘जो बात पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के बारे में कही थी वही बात अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के फ़ैसले के समय उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कही। उच्चतम न्यायालय ने एक ट्रस्ट बनाने के लिए कहा, जिस ट्रस्ट ने सार्वजनिक चंदे से राम मंदिर का निर्माण किया। मोदी सरकार ने राम मंदिर के निर्माण के लिए एक पैसा नहीं दिया।’’
उन्होंने सवाल किया कि जो बात राम मंदिर के लिए सही है, वह सोमनाथ मंदिर के लिए ग़लत कैसे हो सकती है?
भाषा हक हक नरेश
नरेश

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