विवि पाठ्यक्रम से सर सैयद और इकबाल को हटाने के प्रस्ताव पर भाजपा नेता ने जताई आपत्ति

विवि पाठ्यक्रम से सर सैयद और इकबाल को हटाने के प्रस्ताव पर भाजपा नेता ने जताई आपत्ति

विवि पाठ्यक्रम से सर सैयद और इकबाल को हटाने के प्रस्ताव पर भाजपा नेता ने जताई आपत्ति
Modified Date: March 23, 2026 / 07:23 pm IST
Published Date: March 23, 2026 7:23 pm IST

जम्मू, 23 मार्च (भाषा) भाजपा नेता जहांजैब सिरवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से सर सैयद अहमद खान और अल्लामा मोहम्मद इकबाल से संबंधित विषयों को हटाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

विश्वविद्यालय द्वारा गठित एक समिति ने एमए राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम की समीक्षा करते हुए खान, इकबाल और मोहम्मद अली जिन्ना से संबंधित विषयों को हटाने की सिफारिश की है।

यह निर्णय शुक्रवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा जिन्ना पर आधारित अध्याय हटाने की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद सामने आया है।

अपने पत्र में सिरवाल ने 24 मार्च को विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने से पहले इस सिफारिश की समीक्षा करने का अनुरोध किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा, “खान और इकबाल को पाठ्यक्रम से हटाने का प्रस्ताव भारत की बौद्धिक तथा शैक्षिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से को कमजोर कर सकता है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना आवश्यक है।”

उन्होंने कहा कि सर सैयद अहमद खान ने आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और उनके प्रयासों से मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना हुई, जो बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। वहीं, इकबाल की दार्शनिक सोच और उनका प्रसिद्ध देशभक्ति गीत “सारे जहां से अच्छा” भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।

सिरवाल ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्वों को पाठ्यक्रम से हटाने से शैक्षणिक विमर्श सीमित हो सकता है और भारत के राजनीतिक व बौद्धिक इतिहास की संतुलित समझ कमजोर पड़ सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एक समावेशी, संतुलित और भारतीय सभ्यतागत विरासत पर आधारित शिक्षा प्रणाली की बात करती है, जबकि यह प्रस्ताव उसी भावना के विपरीत प्रतीत होता है।

सिरवाल ने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि अंतिम निर्णय से पहले इस सिफारिश की समीक्षा की जाए, ताकि पाठ्यक्रम में आधुनिक भारत को आकार देने वाले सभी विचारों को समुचित स्थान मिल सके।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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