भाजपा नीत सरकार वोट की जरूरत पड़ने पर किसानों को ‘भारत भाग्य विधाता’ मानती है: कांग्रेस सांसद
भाजपा नीत सरकार वोट की जरूरत पड़ने पर किसानों को ‘भारत भाग्य विधाता’ मानती है: कांग्रेस सांसद
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) कांग्रेस के एक सांसद ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि भाजपा नीत सरकार किसानों को ‘‘भारत भाग्य विधाता’’ उस वक्त मानती है, जब उसे वोट की जरूरत होती है और वोट मिल जाने पर वह किसानों एवं मजदूरों की सुध नहीं लेती।
वर्ष 2026-27 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य जयप्रकाश ने लोजपा (रामविलास) के एक सदस्य की टिप्पणी का संदर्भ देते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा नीत सरकार किसानों को ‘भारत भाग्य विधाता’ उस वक्त मानती है, जब आपको वोट की जरूरत होती है। जब आपका वोट बढ़ जाता है, तो आप किसान और मजदूर की सुध नहीं लेते। अगर आप किसान के असली हमदर्द होते तो मनरेगा योजना को बंद नहीं करते।’’
जयप्रकाश ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इसकी गारंटी नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही थी। उन्होंने सवाल किया, ‘‘लेकिन यह कैसे होगा? आपने सिंचाई के लिए कमांड एरिया कितना बढ़ाया है? क्या राजग सरकार ने अपने कार्यकाल में एक भी बांध का निर्माण किया है?’’
कांग्रेस सांसद ने कृषि अनुसंधान पर बजट कम किये जाने का दावा करते हुए कहा कि यदि अनुसंधान नहीं होगा तो उत्तम बीज कहां से आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा बीज विधेयक लेकर आई है जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बीज बेचे जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने हरियाणा में धान की उपज एमएसपी पर नहीं बिकने का दावा करते हुए इसमें संलिप्त लोगों को दंडित करने और मामले की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की भी मांग की।
उन्होंने सरकार की ओर से दिये गए एक जवाब का हवाला देते हुए कहा कि जब ‘विकसित भारत 2047’ के लिए अब तक रोडमैप भी तैयार नहीं किया गया है, तो ऐसे में विकसित भारत कैसे बनेगा।
शिवसेना के धैर्यशील संभाजीराव माने ने गन्ने से निर्मित इथेनॉल आदि से हासिल होने वाले राजस्व में किसानों की हिस्सेदारी भी सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि कारखाने में जो चीनी बनती है वह कैडबरी और कोका-कोला जैसी कंपनियों को तथा घरेलू उपयोग के लिए एक ही दर पर उपलब्ध कराई जाती है।
शिवसेना सांसद ने यह मांग की, ‘‘आम लोगों के उपयोग वाली चीनी को अलग (मूल्य) श्रेणी में रखा जाए तथा कैडबरी और कोका-कोला जैसी कंपनियों के लिए अलग व बढ़ी हुई दर निर्धारित किया जाए।’’
शिवसेना (उबाठा) के संजय देशमुख ने विदर्भ में किसानों की आत्महत्या से संबंधित मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि यवतमाल जिले में इस साल जनवरी में 22 किसानों ने आत्महत्या की। उन्होंने सवाल किया कि क्या विदर्भ के किसानों की जान इतनी सस्ती हो गई है?
उन्होंने कहा कि विदर्भ के किसानों को आर्थिक पैकेज और आय की गारंटी की जरूरत है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के मोहिते पाटिल धैर्यशील राजसिंह ने भी किसानों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देने का आग्रह किया।
भाकपा(माले) लिबरेशन के सुदामा प्रसाद ने कहा कि खेती की लागत बढ़ रही है, मौसम परिवर्तन बढ़ रहा है, लेकिन कृषि उपज के दाम स्थिर हैं।
उन्होंने किसान सम्मान निधि का लाभ बंटाईदार किसानों को भी देने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि बिहार में धान की खरीद का लक्ष्य घटा दिया गया और फसल की खरीद के बाद भी पैसे का भुगतान नहीं किया जा रहा।
जनता दल (यूनाइटेड) के देवेश चंद्र ठाकुर ने प्रखंड स्तर पर भी खाद्यान्नों के भंडारण की व्यवस्था और ‘कोल्ड स्टोरेज’ बनाने की मांग की।
भाषा
सुभाष वैभव
वैभव

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