भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने ‘वंदे मातरम्’ के आंशिक गायन पर फिर विरोध जताया
भाजपा विधायक चन्नाबसप्पा ने ‘वंदे मातरम्’ के आंशिक गायन पर फिर विरोध जताया
शिवमोग्गा, 19 सिंतबर (भाषा) ‘वंदे मातरम्’ के सिर्फ दो अंतरे गाये जाने पर सरकारी समारोह को छोड़कर बाहर निकलने के कुछ दिनों बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक एस एन चन्नाबसप्पा ने शनिवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में इस मुद्दे पर फिर से अपनी नाराजगी जाहिर की।
यह घटना शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली में पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट को लेकर हुई बातचीत के दौरान घटी।
‘वंदे मातरम्’ के दो अंतरे और उसके बाद राज्य का गीत गाए जाने के तत्काल बाद, मंच पर मौजूद चन्नाबसप्पा माइक के पास गए और मुख्यमंत्री से पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाने का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा,‘‘मैं यहां मुख्यमंत्री से एक अनुरोध करने के लिए खड़ा हूं। वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन जब सरकार हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश करती है, तो हमें दुख होता है।’’
भाजपा विधायक ने कहा, ‘‘वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने का आपका फैसला राज्य के लोगों पर असर डाल रहा है। मेरा बस यही अनुरोध है कि पूरा वंदे मातरम् गाया जाए। मेरी और कोई मांग नहीं है। कृपया पूरा वंदे मातरम् गाने का मौका दें।’’
जब चन्नाबसप्पा बोल रहे थे, तो कुछ लोगों ने आपत्ति जताई, जबकि मंच पर मौजूद कुछ लोग उनके पास गए, उन्हें घेर लिया और अपनी कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए उन्हें अपनी सीट पर वापस जाने के लिए कहा।
इसके बाद भाजपा विधायक शिवकुमार के पास गए और उनसे थोड़ी बातचीत करने की कोशिश की। जवाब में मुख्यमंत्री उनकी पीठ थपथपाते नजर आये।
हालाकि, इसके बाद चन्नाबसप्पा कार्यक्रम में शामिल हुए।
सोलह सितंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस’ के मौके पर एक सरकारी कार्यक्रम से भाजपा विधायक बाहर चले गए थे। उन्होंने पूरे राष्ट्रगीत के बजाय ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो अंतरे गाये जाने का विरोध किया था।
शिवमोग्गा के डॉ. बी.आर.आंबेडकर भवन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। चन्नाबसप्पा इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने हाल में आदेश दिया है कि उसके कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएं, सिवाय उन कार्यक्रमों के जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल शामिल हों।
गत जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को एक साथ बजाया जाए, तो ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे गाए जाएं।
भाषा
राजकुमार संतोष
संतोष

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