भाजपा ने आर्थिक पतन से ध्यान भटकाने के लिए राहुल के विदेश दौरे का मुद्दा उठाया: कांग्रेस

भाजपा ने आर्थिक पतन से ध्यान भटकाने के लिए राहुल के विदेश दौरे का मुद्दा उठाया: कांग्रेस

भाजपा ने आर्थिक पतन से ध्यान भटकाने के लिए राहुल के विदेश दौरे का मुद्दा उठाया: कांग्रेस
Modified Date: May 14, 2026 / 04:28 pm IST
Published Date: May 14, 2026 4:28 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) कांग्रेस ने अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हमले के बाद बृहस्पतिवार को पलटवार करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हुए ‘‘आर्थिक पतन’’ से जुड़े विषयों से ध्यान भटकाने के लिए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साध रहा है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि भाजपा नेता संबित पात्रा ने मंत्री पद पर अपना दावा पेश करने के लिए गांधी की विदेश यात्राओं का मामला उठाया है।

रमेश ने कटाक्ष किया कि पात्रा को मंत्री बनने के लिए बेहतर विषय की तलाश करनी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता पात्रा ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए उनकी आय के स्रोत के खुलासे की मांग की।

उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की साल दर साल आय और उनकी विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च के बीच स्पष्ट विसंगति है।

रमेश ने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘यह सब भाजपा के संबित पात्रा की ध्यान भटकाने की कोशिश है। असली मुद्दा आर्थिक पतन का है जो देश को घेर रहा है। असली मुद्दे विदेश नीति में असफलताएं हैं। ये असली मुद्दे हैं।’’

रमेश ने दावा किया कि नरेन्द्र मोदी ‘‘समझौता करने वाले प्रधानमंत्री’’ हैं और वह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं।

भाजपा के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा, ‘‘विश्वगुरु’ होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए।’

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘भाजपा को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।’’

भाषा हक हक मनीषा

मनीषा


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