नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात और उत्तर भारत के अन्य राज्यों के लोगों को ‘‘अशिक्षित’’ कहकर उनका अपमान किया है और उसने विपक्षी पार्टी पर विधानसभा चुनावों से पहले ‘‘फूट डालो और राज करो’’ की राजनीति करने का आरोप लगाया।
खरगे ने रविवार को केरल में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिये गए भाषण में गुजरात के लोगों को ‘अशिक्षित’ बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें ‘बेवकूफ’ बना रहे हैं।
खरगे ने साथ ही कहा कि न तो मोदी और न ही केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन केरल की जनता को मूर्ख बना सकते हैं, क्योंकि वह ‘‘बहुत चतुर और शिक्षित’’ है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘केरल के लोगों को गुमराह मत कीजिए। वे बहुत चतुर और शिक्षित हैं। मोदी जी, विजयन, आप दोनों गुजरात या अन्य जगहों के अशिक्षित लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन केरल के लोगों को मूर्ख नहीं बना सकते।’’
खरगे की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस अध्यक्ष से महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और गुजरात, उत्तर प्रदेश तथा उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से आने वाले कांग्रेस के सभी प्रमुख नेताओं की “बुद्धिमत्ता” पर उनकी राय पूछी।
राज्यसभा सदस्य ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘मैं राहुल गांधी के बारे में नहीं पूछना चाहूंगा, क्योंकि उनके बारे में पूरा देश जानता है।’’
त्रिवेदी ने कहा कि केरल के लोग वास्तव में समझदार और बहुत शिक्षित हैं लेकिन कांग्रेस और वाम दलों, किसी ने भी उनके साथ कभी न्याय नहीं किया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि केरल के लोग बहुत समझदार और शिक्षित हैं। उनकी समझदारी की वजह से ही 45 साल के वाम शासन के बाद तिरुवनंतपुरम में भाजपा ने निकाय चुनाव जीता। केरल के लोग बहुत समझदार हैं। यही वजह है कि ‘लव जिहाद’ का सबसे पहले पता केरल में चला।’’
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि जहां केरल के लोग समझदार हैं, वहीं कांग्रेस और कम्युनिस्ट दलों के नेता “बहुत खतरनाक” हैं।
भाजपा नेता ने कहा, “केरल की जनता आगामी चुनाव में उन्हें करारा जवाब देगी।”
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए नौ अप्रैल को मतदान होगा।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि खरगे ने गुजरात और उत्तर भारत के लोगों के खिलाफ ‘‘चौंकाने वाली टिप्पणियां’’ की हैं, जो पार्टी की ‘‘बांटो और राज करो’’ की मानसिकता को दर्शाती हैं।
पूनावाला ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर गुजरात और उत्तर भारत के लोगों के खिलाफ चौंकाने वाली टिप्पणी की है। यह कांग्रेस की फूट डालो और राज करो की नीति को दर्शाता है। उन्होंने गुजरात और उत्तर प्रदेश के लोगों को सिर्फ इसलिए अपशब्द कहे क्योंकि वे कांग्रेस को वोट नहीं देते। जब कांग्रेस चुनाव हारती है, तो वह लोगों को अपशब्द कहती है।’’
उन्होंने सवाल किया कि क्या गुजरात में कांग्रेस के नेता और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेता ऐसी टिप्पणियों का समर्थन करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या गुजरात कांग्रेस इससे सहमत है? क्या अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव इससे सहमत हैं? यह पहली बार नहीं है। डी.के. सुरेश जैसे कांग्रेस नेताओं ने उत्तर और दक्षिण भारत के विभाजन का आह्वान किया है। उन्होंने उत्तर भारतीयों और उत्तर में रहने वाले अन्य लोगों का अपमान किया है।’’
पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का विभाजनकारी बयान देने का पुराना इतिहास है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की पिछली टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन पर क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
भाजपा के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पंजाब में उनके मुख्यमंत्री ने एक बार उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को ‘भैया’ कहकर संबोधित किया था। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता नियमित रूप से उत्तर भारत के लोगों का अपमान करते हैं। यह कैसी मानसिकता है? इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ लोगों को बांटना चाहती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ पहले उन्होंने (कांग्रेस ने) धर्म के आधार पर बांटा, फिर भाषा के आधार पर, और अब राज्यों के आधार पर। वे हमेशा भारत को बांटने और उन्हें वोट न देने वालों का अपमान करने की कोशिश करते हैं।’’
भाजपा के एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए दोहराया कि मुख्य विपक्षी पार्टी ‘‘बांटो और राज करो’’ की नीति का पालन करती है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर खरगे के भाषण का वीडियो साझा करते हुए पोस्ट किया, ‘‘ ए. ओ. ह्यूम द्वारा स्थापित कांग्रेस, विभाजनकारी राजनीति करना जारी रखे हुए है और यह ‘एक भारतीय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने’ में रुचि रखती है।’’
भंडारी ने लिखा, ‘‘ इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि भारत की जनता ने इस विभाजनकारी कांग्रेस को नकार दिया है, जिसके वैचारिक मार्गदर्शक ‘अर्बन नक्सल’ जैसे लोग हैं और जो एक भारतीय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना चाहती है। कांग्रेस भारत की एकता के खिलाफ है।’’
भाषा सिम्मी प्रशांत
प्रशांत