Donation for Iran in India || Image- ANI News File Image
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख इलाके में रहने वाले शिया मुस्लिमों के बीच ईरान के अलग और उनकी हिफाजत के लिए चिंताएं कम नहीं हो रही है। इसे इस बात से ही समझा सकता ही कि, घाटी में अब तक इस समुदाय ने ईरान के मदद के लिए अब तक करोड़ो रुपये इकट्ठे कर लिए है। (Donation for Iran in India) कोई अपनी बचत ईरान को देना चाहता है तो महिलायें अपने गहने और जेवर बेचकर पैसे और मदद इकट्ठा कर रही है। इसी बीच एक चौंकाने वाली नीलामी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।
धन जुटाने के लिए शिया समुदाय के लोग नई नई तरकीबें अपना रहे है। इस बीच एक मामूली अंडे की नीलामी करीब 25000 रुपये में हुई है। अंडे खरीदने वाले शख्स का नाम शब्बीर हुसैन है। शब्बीर ने इस बारें में बताया की, “सब जानते हैं कि एक अंडे की कीमत 10 रुपये होती है। मैंने 25 हजार रुपये इसलिए नहीं दिए क्योंकि मेरे पास थे। इससे हमें यह संदेश मिलता है कि ईरान में बच्चों पर कितना अत्याचार हो रहा है। इसलिए मैंने उनके लिए 25 हजार रुपये दिए। हम अपनी जान देने को तैयार हैं। हम इस समुदाय के लिए जिएंगे। हमें अपने नेता के हर आदेश का पालन करना होगा। अभी तक हमारे नेता ने हमें कोई आदेश नहीं दिया है।
#WATCH | Leh, Ladakh: People of Leh district give different types of donations for Iran victims. During this, one egg was auctioned for Rs 25 thousand.
A local resident, Shabir Hussain, says, “… Everyone knows that the price of an egg is Rs 10. I didn’t pay Rs 25 thousand… pic.twitter.com/yGSD4NVXRc
— ANI (@ANI) April 5, 2026
बता दें कि, सप्ताह भर पहले इसी तरह एक मुर्गी की भी नीलामी की गई थी। (Donation for Iran in India) दरअसल कारगिल इलाके में नीलामी में मुर्गे को एक स्थानीय निवासी ने 1,25,000 रुपये में खरीदा था।
हैरानी की बात यह है कि, इन अभियानों के लिए स्थानीय लोग केवल नकद ही नहीं, बल्कि आभूषण, बर्तन, जानवर और यहां तक कि मोटरसाइकिल, कार और साइकिल जैसे वाहन भी दान कर रहे हैं। दान शिविरों में हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कठिन समय में ईरान के लोगों के साथ खड़ा होना उनका नैतिक कर्तव्य है। समाजसेवियों और आयोजकों के अनुसार, इस तरह के अभियानों से न सिर्फ राहत राशि जुटाई जा रही है, बल्कि आपसी एकजुटता और मानवीय मूल्यों को भी मजबूती मिल रही है।
गौरतलब है कि, जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर शिया मुस्लिम निवास करते है। युद्ध के शुरुआत में जब ईरानी सुप्रीमो अयातुल्लाह ख़ामेनेई की मौत हुई थी तो इस इलाके में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। लोगों ने सड़कों पर उतारकर शोक भी मनाया था। दावा किया गया था कि, समुदाय ने कुछ ही दिनों में ईरान की मदद के लिए करोड़ो रुपये इकट्ठे कर लिए थे।
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