भाजपा ने सनातन विरोधी टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन की आलोचना की

भाजपा ने सनातन विरोधी टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन की आलोचना की

भाजपा ने सनातन विरोधी टिप्पणी को लेकर उदयनिधि स्टालिन की आलोचना की
Modified Date: May 12, 2026 / 04:50 pm IST
Published Date: May 12, 2026 4:50 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर किए गए नए हमलों की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही पार्टी ने उन पर तथा अन्य विपक्षी दलों पर वोट बैंक की राजनीति के लिए ‘सनातन के खिलाफ नफरत’ फैलाने में लिप्त होने का आरोप लगाया।

भाजपा की प्रतिक्रिया उदयनिधि स्टालिन द्वारा मंगलवार को सनातन धर्म को ‘समाप्त’ करने का आह्वान करने के बाद आयी है। स्टालिन ने दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है। उन्होंने सितंबर 2023 में भी इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी की थी।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि तमिलनाडु में द्रमुक की चुनावी हार के बावजूद, उदयनिधि स्टालिन फिर वही करने लगे हैं जो वे ‘‘सबसे अच्छा करते हैं – सनातन धर्म का अपमान और उसके खिलाफ नफरत फैलाना।’’

पूनावाला ने कहा, ‘‘उन्होंने अब विधानसभा में कहा है कि सनातन धर्म को समाप्त कर देना चाहिए। पिछली बार जब उन्होंने इस तरह की टिप्पणी की थी, तब उच्चतम न्यायालय ने भी उसे नफरती भाषण करार दिया था।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम .के. स्टालिन ने उस समय हुए विवाद को लेकर अपने बेटे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया, जबकि कांग्रेस ने भी उन टिप्पणियों की निंदा नहीं की।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता पूनावाला ने कहा, ‘चुनावी हार और लोगों द्वारा उनके हिंदू-विरोधी और सनातन-विरोधी दृष्टिकोण को खारिज किए जाने के बावजूद, उन्होंने कोई सबक नहीं लिया है। वे अब भी सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं।’

विपक्षी नेताओं का उल्लेख करते हुए पूनावाला ने कहा कि हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और द्रमुख अध्यक्ष एम के स्टालिन को झटका लगा, लेकिन भाजपा के विरोधी दलों ने अब भी सनातन धर्म के प्रति अपना दृष्टिकोण नहीं बदला है।

पूनावाला ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक पर भी ‘सनातन धर्म के प्रति नफरत’ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘सनातन धर्म का अपमान करना उनका राजनीतिक मॉडल बन गया है और वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म का अनादर करना उनकी पहचान बन गई है। तमिलनाडु की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।’

विपक्षी दलों द्वारा सनातन धर्म पर बार-बार किए जा रहे हमलों का उल्लेख करते हुए पूनावाला ने कहा, ‘यह कोई संयोग नहीं, बल्कि वोट बैंक की राजनीति का एक प्रयोग है।’

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि विपक्ष ‘तमिल थाई वझुथु’ (तमिल प्रार्थना गीत) को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को ‘बर्दाश्त नहीं करेगा’।

उन्होंने कहा, ‘सनातन धर्म, जो लोगों को बांटता है, उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।’ 2023 में उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई इसी तरह की टिप्पणियों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके चलते द्रमुक नेता को हिंदू समर्थक संगठनों की आलोचना और मुकदमों का सामना करना पड़ा था।

उदयनिधि ने नयी सरकार के हालिया शपथ ग्रहण समारोह के संबंध में एक विशिष्ट शिकायत को उजागर करते हुए कहा कि राज्य के गीत को उसकी पारंपरिक प्राथमिकता के बजाय क्रम में तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया।

उन्होंने कहा, “आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में जो घटना घटी, वह एक गलती थी और विधानसभा में इसे दोबारा होने नहीं देना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

द्रमुक नेता ने कहा कि न केवल विधानसभा में, बल्कि तमिलनाडु में आयोजित किसी भी कार्यक्रम में “तमिल थाई वझथु” को हमेशा प्रथम स्थान दिया जाना चाहिए।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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