BJP Vande Mataram Resolution: वंदे मातरम पर BJP का 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव, नितिन नबीन की टीम की पहली बैठक में मिली मंजूरी, कांग्रेस के फैसले पर जताई नाराजगी

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BJP Vande Mataram Resolution: वंदे मातरम पर BJP का 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव, नितिन नबीन की टीम की पहली बैठक में मिली मंजूरी, कांग्रेस के फैसले पर जताई नाराजगी

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 02:53 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 02:54 PM IST

BJP Vande Mataram Resolution | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • वंदे मातरम पर BJP का बड़ा प्रस्ताव
  • टीम नवीन की बैठक में 10 बिंदुओं पर लगी मुहर
  • पहली बैठक में मिली मंजूरी

नई दिल्ली: BJP Vande Mataram Resolution बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने 22 अगस्त 2026, शनिवार को अपनी नई टीम की पहली बैठक ली। इस बैठक में ‘वंदे मातरम‘ को लेकर 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। (Vande Mataram News) नितिन नबीन ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि इस गीत के सम्मान और इसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा को लेकर एक अहम प्रस्ताव पारित किया गया है।

BJP Vande Mataram Resolution उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध किया।

उन्होंने अपने एक्स पर लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है।

भाजपा वन्दे मातरम् को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है।

अतः भारतीय जनता पार्टी संकल्प करती है:

1. 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए वन्दे मातरम् के प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट विरोध करेगी।

2. पूर्ण वन्दे मातरम् के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय स्वरूप की रक्षा करेगी, इसे भारत का राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत मानेगी।

3. 1950 में संविधान सभा की घोषणा तथा 2026 में संसद द्वारा राष्ट्रीय गीत को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान किए जाने से स्थापित स्थिति की दृढ़ता से पुष्टि करेगी।

4. राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने के हर प्रयास का विरोध करेगी।

5. कांग्रेस को स्मरण कराएगी कि उसकी कार्यसमिति का कोई प्रस्ताव भारत के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। 1937 का राजनीतिक समझौता 1950 के संवैधानिक निर्णय और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।

6. जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करेगी, जिसमें वन्दे मातरम् के गायन को सीमित किया गया था, जिसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां तथा बाद में बढ़ती सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति शामिल थी।

7. महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वन्दे मातरम् को “साम्राज्यवाद-विरोधी नारा” और “शुद्धतम राष्ट्रीय भावना” से जुड़ा हुआ बताया था।

8. भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से देशव्यापी अभियान चलाएगी, जिसके अंतर्गत वन्दे मातरम् का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जाएगी।

9. विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा, ताकि छह पदों वाले पूर्ण राष्ट्रीय गीत और उसके इतिहास को विस्मृति में न जाने दिया जाए तथा आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि वन्दे मातरम् के साथ भारत की स्वतंत्रता, संघर्ष, बलिदान और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी स्मृतियां जुड़ी हैं।

10. राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए वन्दे मातरम् के सम्मान और विरासत से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है। यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से आह्वान करती है कि वे स्मरण रखें – वन्दे मातरम् के शब्द कभी इतने शक्तिशाली थे कि एक साम्राज्य उनसे भयभीत हो उठा था। अंग्रेजों ने इन्हें दबाने का प्रयास इसलिए किया क्योंकि इन शब्दों ने प्रतिरोध की चेतना जगाई थी। पीढ़ियों के भारतीयों ने इन्हें स्वतंत्रता, बलिदान और राष्ट्रगौरव के मंत्र के रूप में अपनाया।

इस विरासत को आज की वोट-बैंक राजनीति की गणित में सीमित नहीं किया जा सकता।

1947 में भारत की स्वतंत्रता का जयघोष ‘वंदे मातरम्’ था, और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ का महाघोष भी ‘वंदे मातरम्’ ही होगा।

इन्हें भी पढ़ें:-

भाजपा ने प्रस्ताव कब पारित किया?

22 अगस्त 2026 को।

कांग्रेस ने वंदे मातरम् को लेकर क्या निर्णय लिया था?

केवल प्रथम दो पदों तक गायन सीमित करने का।

भाजपा ने वंदे मातरम् को किस रूप में माना है?

भारत का राष्ट्रीय गीत, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक।