भाजपा के प्रस्ताव में वंदे मातरम् पर कांग्रेस के निर्णय की आलोचना

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भाजपा के प्रस्ताव में वंदे मातरम् पर कांग्रेस के निर्णय की आलोचना

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 06:20 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 06:20 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस के फ़ैसले की शनिवार को एक प्रस्ताव पारित करके निंदा की और कहा कि वह राजनीतिक सहूलियत या तुष्टिकरण के लिए राष्ट्रगीत के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगी।

भाजपा ने यहां अपने नए पदाधिकारियों की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा कि कांग्रेस देश के संवैधानिक संस्थानों या कानूनों को दरकिनार नहीं कर सकती।

भाजपा ने घोषणा की कि वह ‘वंदे मातरम्’ की महत्ता को देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए एक अभियान शुरू करेगी।

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बैठक की अध्यक्षता की तथा बाद में ‘एक्स’ पर प्रस्ताव साझा किया।

भाजपा का प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने बुधवार को अपने 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सिर्फ दो ही अंतरे गाये जायेंगे।

नवीन ने कहा, ‘‘भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज, 22 अगस्त 2026 को, ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत को संजोकर रखने के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया।’’

उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस कार्य समिति के 19 अगस्त, 2026 के उस फैसले की ‘कड़ी निंदा और स्पष्ट तौर पर विरोध’ करती है, जिसमें 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ शुरुआती दो अंतरे को गाने तक सीमित कर दिया गया है।

नवीन ने कहा कि भाजपा राष्ट्र गीत को ‘सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति’ का शिकार बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक सहूलियत या तुष्टीकरण के लिए ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और विरासत से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।’’

नवीन ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति का कोई प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं या कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि 1937 का कोई ‘राजनीतिक समझौता’ 1950 के संवैधानिक प्रावधानों और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

संसद ने 30 जुलाई को ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ पारित किया, जो ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ के समान कानूनी दर्जा देता है।

संशोधित कानून के तहत, जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ के गायन में बाधा डालना या उसे रोकना एक अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत को भारत के हर कोने तक पहुंचाने के लिए एक अभियान शुरू करेगी।

उन्होंने कहा,‘‘ भाजपा ‘पूर्ण वंदे मातरम्’ के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय चरित्र की रक्षा करेगी।’’

उन्होंने कहा कि भाजपा महात्मा गांधी के उस बयान का भी प्रचार करेगी जिसमें उन्होंने वंदे मातरम को ‘साम्राज्यवाद-विरोधी नारा’ और ‘सबसे शुद्ध राष्ट्रीय भावना’ से जुड़ा हुआ बताया था।

नवीन ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने खासकर युवा पीढ़ी के बीच जागरूकता अभियान शुरू करने का भी संकल्प लिया है, ताकि छह अंतरों वाले पूरे राष्ट्रगीत और उसके इतिहास को भुलाया न जा सके तथा आने वाली पीढ़ियां वंदे मातरम से जुड़ी भारत की आज़ादी की यादों को समझ सकें।

उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला सिर्फ़ किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं है। यह भारत के सम्मान और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देने वाले अनगिनत देशभक्तों की विरासत से जुड़ा है।’’’

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा हर नागरिक से यह याद रखने को कहती है कि ‘वंदे मातरम्’ शब्द कभी इतने ताकतवर थे कि एक साम्राज्य को भी डरा सकते थे। अंग्रेज़ों ने उन्हें दबाने की कोशिश की क्योंकि उनसे विरोध की भावना जागती थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उस विरासत को आज की वोट-बैंक की राजनीति के हिसाब-किताब तक सीमित नहीं किया जा सकता।’’

इस हफ़्ते के शुरू में भाजपा ने नवीन के नेतृत्व में एक नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा की, जिसमें 65 पदाधिकारी शामिल हैं और इनमें 51 नए चेहरे हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शनिवार की बैठक में आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारियों, ज़मीनी स्तर पर लोगों को एकजुट करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर चर्चा हुई।

भाषा राजकुमार पवनेश

पवनेश