बंगाल में एसआईआर के दौरान हुई मौतों और तनाव को लेकर बीएलओ ने विरोध प्रदर्शन किया

बंगाल में एसआईआर के दौरान हुई मौतों और तनाव को लेकर बीएलओ ने विरोध प्रदर्शन किया

बंगाल में एसआईआर के दौरान हुई मौतों और तनाव को लेकर बीएलओ ने विरोध प्रदर्शन किया
Modified Date: January 12, 2026 / 05:19 pm IST
Published Date: January 12, 2026 5:19 pm IST

कोलकाता, 12 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के एक वर्ग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सामने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया गया कि निर्वाचन आयोग (ईसी) मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कई बीएलओ की मौत के प्रति उदासीन रहा है।

प्रदर्शनकारी बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्य हैं। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद से राज्य भर के बीएलओ ‘अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव’ में हैं और इसके काम का भार उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिकारी सख्त समयसीमा, व्यापक फील्ड सत्यापन और बड़ी मात्रा में डेटा की जांच से जुड़े तनाव के कारण ‘प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान हिम्मत हार गए।

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आंदोलनकारी बीएलओ ने पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने के बाद से विभिन्न जिलों में अधिकारियों की कई मौतों की खबरों का भी हवाला दिया।

आयोग की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि संशोधन संबंधी कर्तव्यों का पालन करते समय बीमार पड़ने या जान गंवाने वाले बीएलओ के लिए मुआवजे की घोषणा क्यों नहीं की गई है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा,“राज्य सरकार चुनाव ड्यूटी के दौरान हताहत होने पर मुआवजा देती है। फिर निर्वाचन आयोग उन मतदान कर्मियों को बुनियादी सहायता भी क्यों नहीं दे रहा है जो उसके द्वारा सौंपे गए अनिवार्य कार्य को करते समय बीमार पड़ जाते हैं या मर जाते हैं?”

यह प्रदर्शन सीईओ के कार्यालय के सामने आयोजित किया गया था, जिसमें समिति ने तत्काल हस्तक्षेप, कार्य के भार का युक्तिकरण और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कवायद में लगे बीएलओ के लिए एक औपचारिक मुआवजा नीति की मांग की।

भाषा नोमान मनीषा

मनीषा


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