ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच: सीजेआई ने स्वस्थ असहमति, विचार-विमर्श की संस्कृति की जरूरत पर दिया जोर

ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच: सीजेआई ने स्वस्थ असहमति, विचार-विमर्श की संस्कृति की जरूरत पर दिया जोर

ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच: सीजेआई ने स्वस्थ असहमति, विचार-विमर्श की संस्कृति की जरूरत पर दिया जोर
Modified Date: September 5, 2026 / 08:03 pm IST
Published Date: September 5, 2026 8:03 pm IST

नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को यहां ‘ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश फोरम’ (ब्रिक्स-सीजेएफ) में स्वस्थ असहमति और विचार-विमर्श की संस्कृति के महत्व पर जोर दिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस फोरम में ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों तथा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय की समयबद्ध और पूर्वानुमेय व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इस अवसर पर ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका और समूह के अन्य सदस्य एवं साझेदार देशों के न्यायिक अधिकारियों ने भी संबोधित किया।

ब्राजील के सर्वोच्च संघीय न्यायालय के अध्यक्ष लुइज एडसन फाचिन ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभा को संबोधित किया। रूस के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश इगोर क्रास्नोव, चीन के प्रधान न्यायाधीश और सर्वोच्च जन न्यायालय के अध्यक्ष झांग जुन, मिस्र के सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बौलोस गहमी इस्कंदर बौलोस और इंडोनेशिया के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश सुनार्तो ने भी अपने विचार रखे।

अन्य वक्ताओं में संयुक्त अरब अमीरात के संघीय सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष मोहम्मद हमद अल बादी अल धाहेरी, बेलारूस के सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष आंद्रेई श्वेद, कजाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष असलाम्बेक मर्गालियेव, दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च अपील अदालत अध्यक्ष महुबे बेट्टी मोलेमेला, ईरान के प्रधान न्यायाधीश अयातुल्ला गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई और उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय की उपाध्यक्ष मलिकाखोन कलंदरावा शामिल थीं।

ब्राजील के सर्वोच्च संघीय न्यायालय के अध्यक्ष ने सभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता और बदलाव के मौजूदा दौर में अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में कानून के शासन को कायम रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चीन के प्रधान न्यायाधीश ने न्यायिक सहयोग को ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए महत्वपूर्ण योगदान बताया और सदस्य एवं साझेदार देशों के बीच एकजुटता एवं सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने मौजूदा औद्योगिक बदलाव के दौर में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सामाजिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने न्यायिक कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया और सीमापार वाणिज्यिक विवादों के समाधान में न्यायपालिका की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

चीन के प्रधान न्यायाधीश ने कानूनी प्रणालियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और विश्व न्यायिक सभ्यता के निर्माण में योगदान देने का भी आह्वान किया।

मिस्र के सर्वोच्च संवैधानिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष कानूनी व्यवस्था तथा वैश्विक स्तर पर साझा आवाज की जरूरत पर बात की। वहीं, इथियोपिया के संघीय सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष ने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया और कानून के शासन तथा आर्थिक विकास के बीच संबंध पर चर्चा की।

इंडोनेशिया के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान और सदस्य देशों के बीच न्यायिक संवाद के लिए एक टिकाऊ मंच की जरूरत बताई।

ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ब्रिक्स आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम को आकार दे रहा है। उन्होंने मानवाधिकारों, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के व्यापक उल्लंघन, मानवीय संकट तथा नागरिकों के विस्थापन को लेकर चिंता जताई।

रूस के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सहयोग और बहुध्रुवीय विश्व सुनिश्चित करने में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।

दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च अपील अदालत की अध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग का आह्वान किया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात के संघीय सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष ने कहा कि मध्यस्थता और सुलह आधुनिक अर्थव्यवस्था के अभिन्न अंग हैं।

ब्रिक्स प्रधान न्यायाधीश मंच के दूसरे दिन चार महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। उच्चतम न्यायालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, मंच ने ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के बीच न्यायिक संवाद को मजबूत करने, अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा उभरते कानूनी और संस्थागत मुद्दों पर गहरा सहयोग विकसित करने का अवसर प्रदान किया।

भाषा अमित सुरेश

सुरेश


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