शह मात The Big Debate: 13 साल बाद झीरम का ‘इंसाफ’, फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल, क्या हमले को लेकर उठने वाले सवालों का हुआ समाधान?

13 साल बाद झीरम का 'इंसाफ', फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल, Verdict on Jhiram Naxal attack after 13 years

शह मात The Big Debate: 13 साल बाद झीरम का ‘इंसाफ’, फैसले पर कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल, क्या हमले को लेकर उठने वाले सवालों का हुआ समाधान?
Modified Date: September 6, 2026 / 12:42 am IST
Published Date: September 6, 2026 12:11 am IST

रायपुरः Jhiram Naxal Attack 13 साल बाद झीरम नक्सल हमला कांड का फैसला आया NIA जांच रिपोर्ट पर बनी चार्जशीट पर कोर्ट ने फैसला सुनाया। 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया तो कांग्रेस ने कहा हमारे नेताओं की सुपारी किलिंग करवाई गई। इसका सच सामने लाने केवल और केवल नार्को टेस्ट ही विकल्प है?

Jhiram Naxal Attack झीरम नक्सल हमला मामले में में 13 साल बाद NIA कोर्ट का फैसला आ गया। कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया, 25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नक्सली हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में तत्कालीन पीसीसी चीफ नंदकुमार पटेल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत कुल 32 लोगों की हत्या कर दी गई थी। 10 नक्सली जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया उन्हें कोर्ट ने दोषी करार दिया।

फैसला आते ही झीरम के पीड़ित परिजनों और कांग्रेसियों ने खुलकर कहा कि न्याय अधूरा ही रह गया। छोटे नक्सलियों को सजा देकर मूल साजिशकर्ताओं को बचाया जा रहा। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों की शिकायत है कि उन्हें ना तो जांच का हिस्सा बनाया, ना गवाही के लिए बुलाया। कांग्रेस का सीधा-सीधा आरोप है। ये सुपारी किलिंग थी। इधर, बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों को कोरी सियासत करार दिया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कोर्ट का फैसला आ गया दोषी सामने हैं। बृजमोहन ने तंज कसा कि कांग्रेसी नेता तो दावे से झीरम का प्रमाण जेब में लेकर घूमते रहे पर कभी कुछ किया नहीं। नसीहत दी कि कांग्रेस चाहे तो हाईकोर्ट जा सकती है। 5 साल सरकार किसकी सरकार थी। NIA की जांच सही साबित हुई तब न NIA ने फैसला दिया है और जिस समय NIA को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी।

झीरम कांड, किसी भी सियासी दल पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा नक्सल हमला है, जिसमें छग कांग्रेस नेताओं की एक पूरी पीढ़ी खत्म हो गई। ये भी सच है कि कांग्रेस के कुछ नेता नक्सलियों के टार्गेट पर थे, लेकिन क्या ये वाकई सुपारी किलिंग था जैसा आरोप है, क्या पीड़ितों को इंसाफ मिला?


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सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।