(अपर्णा बोस)
नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) बिक्स देशों के तकनीकी विशेषज्ञों की जलवायु-अनुकूल और आपदा-रोधी शहरी बुनियादी ढांचा के लिए स्वैच्छिक सिद्धांतों विषय पर आयोजित बैठक में योजना और कार्यान्वयन में समुदायों के समावेशन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। यह जानकारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
एनडीएमए के सदस्य और विभाग प्रमुख कृष्णा स्वरूप वत्स ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) समूह के तहत ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ हुई बैठकों के बारे में ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया कि चर्चा के विषयों में कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए शहरों को ज्यादा सुरक्षित बनाना और आपदा प्रबंधन में सबको साथ लेकर चलने वाला नजरिया अपनाना शामिल था।
वत्स ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘शायद बैठकों में सबसे अहम बात जो उठाई गई, वह थी योजना और उसे लागू करने में समुदायों को शामिल करना। शहरों को लोगों, खासकर कमजोर सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का ज्यादा ख्याल रखना चाहिए और उनकी सुरक्षा करनी चाहिए। साथ ही, हमें आपदा प्रबंधन में हमेशा सबको साथ लेकर चलने वाला नजरिया अपनाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये कुछ सबसे अहम चिंताएं हैं जो ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों ने साझा रूप से सामने रखी।’’
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने जलवायु-अनुकूल और आपदा-रोधी शहरी बुनियादी ढांचा के लिए स्वैच्छिक सिद्धांत, 2026 के लिए सहयोगी नीतिगत ढांचा तैयार किया है। भारत के एनडीएमए के नेतृत्व में तैयार ये दिशा-निर्देश सदस्य देशों को तेज़ी से बढ़ते पर्यावरणीय खतरों से सार्वजनिक सेवाओं, लोगों की जान और शहरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक खाका प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। ये दिशा-निर्देश बाध्यकारी नहीं हैं।
एनडीएमए अधिकारी ने कहा, ‘‘बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई कि हमें ब्रिक्स देशों द्वारा शुरू किए गए अलग-अलग नवोन्मेष और कार्यक्रमों को किस नज़रिए से देखना चाहिए, ताकि शहर के स्तर पर अवसंरचना योजना के लिए जरूरी सीख मिल सके। साथ ही, बाढ़ की निगरानी, भीषण गर्मी की स्थिति का प्रबंधन और शहरों के सामने आने वाले दूसरे खतरों और आपात स्थितियों से निपटने पर भी बात हुई।’’
ब्रिक्स डीआरआर समूह की 22 और 23 जुलाई को होने वाली तीसरी बैठक के बाद अंतिम नतीजा आने की उम्मीद है, और 24 जुलाई को होने वाली मंत्री-स्तरीय बैठक में इसे औपचारिक रूप से मंजूरी मिलेगी।
भाषा धीरज मनीषा
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