(Budget 2026/ Image Credit: IBC24 News)
नई दिल्ली: Budget 2026 के पास आते ही मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की बेचैनी और उम्मीदें दोनों बढ़ गई हैं। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा सेक्शन 80C को लेकर है। टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि 80C की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी जाए, ताकि वे ज्यादा टैक्स बचा सकें और अपनी बचत को बढ़ावा दे सकें।
सेक्शन 80C आयकर अधिनियम का वह प्रावधान है जो टैक्सपेयर्स को पीपीएफ, ईएलएसएस, जीवन बीमा, एनएससी और कुछ पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स में निवेश करने पर टैक्स बचाने की सुविधा देता है। यह ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहित करता है।
अभी सेक्शन 80C के तहत अधिकतम डिडक्शन 1.5 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष है। आखिरी बार यह सीमा 2014 में बढ़ाई गई थी। तब से 12 साल हो गए हैं, लेकिन महंगाई और खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। शिक्षा, हेल्थकेयर और जीवन बीमा पर खर्च बढ़ा, लेकिन टैक्स डिडक्शन की सीमा स्थिर रही।
मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स का कहना है कि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और टैक्स बचाने के विकल्प सीमित हैं। अगर 80C की सीमा बढ़ाई जाती है, तो उन्हें ज्यादा बचत करने और निवेश को मजबूत बनाने का अवसर मिलेगा। यह विशेष रूप से लंबी अवधि के फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए जरूरी है।
इंडस्ट्री बॉडीज और टैक्स एक्सपर्ट्स लंबे समय से सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि 80C की सीमा बढ़ाई जाए। अमेरिकी चेंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने भी औपचारिक रूप से 3.5 लाख रुपये तक सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे देश में निवेश की संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
80C की सीमा बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त राहत मिलेगी। इसके अलावा, लोग लंबी अवधि के निवेश जैसे पीपीएफ, ईएलएसएस और बीमा में अधिक निवेश करेंगे। इससे रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा और बीमा कवरेज बढ़ेगा, जो आज के समय में बेहद जरूरी हो चुका है।
अगर बजट में 80C की सीमा 3 लाख या उससे अधिक की जाती है, तो यह मिडिल क्लास के लिए बड़ी खुशखबरी होगी। टैक्स बचत के साथ-साथ लोग लंबी अवधि के निवेश और सुरक्षित फाइनेंशियल प्लानिंग की ओर कदम बढ़ा पाएंगे। बजट से पहले यह खबर हर टैक्सपेयर की चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।
टैक्सपेयर्स की नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट (Budget 2026) पेश करेंगी। इस बार की चर्चा में यही सवाल है कि क्या सरकार सेक्शन 80C की सीमा बढ़ाएगी और मिडिल क्लास को राहत देगी। यह कदम वित्तीय सुरक्षा और बचत संस्कृति दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।