बेंगलुरु/तिरुवनंतपुरम, 31 जनवरी (भाषा) बेंगलुरु में रियल एस्टेट कारोबारी की कथित आत्महत्या के मामले में जांच के लिए शनिवार को पुलिस की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। पड़ोसी राज्य केरल के विभिन्न दलों ने मामले में गहन जांच की मांग की है।
कारोबारी के परिवार का आरोप है कि उन पर आयकर विभाग का दबाव था, जो उनकी जांच कर रहा था।
केरल में सत्तारुढ़ और विपक्षी दलों द्वारा सी जे राय की मौत की व्यापक जांच की मांग के बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने पुलिस को ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ के अध्यक्ष की कथित आत्महत्या के मामले में जांच का निर्देश दिया। गृह मंत्री परमेश्वर के निर्देश के बाद बेंगलुरु पुलिस ने एसआईटी के गठन की घोषणा की।
बेंगलुरु पुलिस के एक बयान में कहा गया, ‘‘इस मामले की व्यापक और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए, बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमंथ कुमार सिंह ने एसआईटी के गठन का आदेश दिया है।’’
एसआईटी का नेतृत्व पश्चिमी क्षेत्र के संयुक्त पुलिस आयुक्त सी वामशी कृष्णा करेंगे। बयान में कहा गया कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी और संबंधित जानकारी आने वाले दिनों में लोगों को दी जाएगी।
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘हम जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे। अभी मैं कुछ नहीं कह सकता जब तक कि हमें यह पता न चल जाए कि किन कारणों से यह घटना हुई।’’
कारोबारी राय को बेंगलुरु में रिचमंड सर्कल के पास स्थित उनके कार्यालय में उनकी लाइसेंसी हथियार से गोली लगी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। गोली चलने की आवाज आने पर कमरे में बाकी कर्मचारी पहुंचे, जहां राय जख्मी हालत में मिले। राय को तुंरत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि राय के परिसर में तलाशी करीब दो महीने पहले शुरू हुई थी।
राय के भाई ने आरोप लगाया है कि उन्होंने केंद्रीय एजेंसी के दबाव के कारण यह कदम उठाया होगा।
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के अनुसार, मूल रूप से केरल के रहने वाले राय स्लोवाक गणराज्य के मानद दूत भी थे।
केरल में, सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और विपक्षी गठबंधन कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने राय की मौत की व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि घटना के पीछे के तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।
माकपा के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन, राज्यसभा सदस्य ए ए रहीम और विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कहा कि राय की मौत के कारणों की जांच होनी चाहिए।
तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बातचीत में गोविंदन ने सवाल उठाया कि जब केंद्रीय एजेंसियां छापेमारी और इसी तरह की कार्रवाइयां करती हैं, तो वे अधिक मानवीय तरीके से क्यों काम नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि राय के कार्यालय में छापेमारी उनकी मौत के बाद भी जारी रही।
सतीशन ने कारोबारी की मौत के पीछे ‘‘रहस्य’’ होने की बात कही और मामले की जांच की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि आयकर विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें किस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।’’
अभिनेता मोहनलाल ने भी कारोबारी के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं प्रिय मित्र सी जे राय के निधन से दुखी हूं। दुख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।”
कारोबारी द्वारा निर्मित कुछ फिल्मों में अभिनय कर चुके मोहनलाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘वह एक दोस्त से कहीं बढ़कर थे, उन्हें हमेशा प्यार और स्नेह के साथ याद किया जाएगा।’’
बेंगलुरु में, परमेश्वर ने कहा कि आयकर विभाग ने पूर्व में राय की कंपनी पर छापेमारी की थी और वैधानिक प्रविधियों को पूरा करने की प्रक्रिया में था।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल दिसंबर में उनकी कंपनी पर छापा मारा गया था। नियम के अनुसार 60 दिन के भीतर अदालत में आरोपपत्र दाखिल करना होता है। उन्हें चार फरवरी से पहले इसे अंतिम रूप देना था। इसलिए उन्हें तलब किया गया था।’’
परमेश्वर ने बताया कि राय हाल में विदेश से लौटे थे और अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे थे।
परमेश्वर ने कहा, ‘‘तीन दिन पहले वह दुबई से लौटे थे। आयकर विभाग के अधिकारी उनका बयान दर्ज करने उनके कार्यालय गए थे। उन्होंने जवाब भी दिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसी बीच, राय ने अधिकारियों से कहा कि वह पांच मिनट में वापस आ जाएंगे, लेकिन 20 मिनट बीत जाने के बाद भी वह नहीं लौटे। तब उनकी आत्महत्या की बात सामने आई।’’
परमेश्वर ने कहा कि उन्होंने घटना की पुलिस जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पुलिस अधिकारियों को घटना के कारणों की जांच करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।’’
उन्होंने कहा कि राय के परिवार ने इस घटना को आयकर विभाग की कार्रवाई से जोड़ा है।
आयकर विभाग की छापेमारी में किसी राजनीतिक पहलू के बारे में पूछे जाने पर गृह मंत्री ने अटकलें लगाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘गृह मंत्री होने के नाते मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।’’
जांच के दायरे को स्पष्ट करते हुए परमेश्वर ने कहा, ‘‘पुलिस केवल आत्महत्या के मामले की जांच करेगी। अगर कोई और बात सामने आती है, तो उसकी भी जांच की जाएगी।’’
कर्नाटक के वाणिज्य और उद्योग मंत्री एम बी पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आर्थिक अपराध को अन्य अपराधों की तरह नहीं माना जाना चाहिए और इसे दीवानी मामले की तरह निपटाया जाना चाहिए।
पाटिल ने कहा, ‘‘सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी एजेंसियों के जरिये डर फैलाना उचित नहीं है। जांच से ही पता चलेगा कि वास्तव में क्या हुआ था, लेकिन मेरा कहना यह है कि आर्थिक अपराधों के लिए दंड के प्रावधान हैं और उनके समाधान भी मौजूद हैं, लेकिन इसे आपराधिक कृत्य की तरह नहीं माना जाना चाहिए।’’
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