हरियाणा:पति को पत्नी का शव ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा,अस्पताल पर सहायता ना करने का आरोप

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हरियाणा:पति को पत्नी का शव ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा,अस्पताल पर सहायता ना करने का आरोप

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  • Publish Date - January 31, 2026 / 09:53 PM IST,
    Updated On - January 31, 2026 / 09:53 PM IST

फरीदाबाद, 31 जनवरी (भाषा) हरियाणा के फरीदाबाद में सरकारी अस्पताल की कथित उपेक्षा से जुड़ा एक अमानवीय मामला सामने आया है जिसके तहत एक पति को मजबूर होकर पत्नी का शव ठेले पर रखकर 12 किलोमीटर दूर अपने घर ले जाना पड़ा।

तपेदिक (टीबी) से जूझ रही 35 वर्षीय महिला की यहां बादशाह खान सिविल अस्पताल में मौत हो गई। मृतका के परिजनों का दावा है कि अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा परिवहन सहायता देने से इनकार करने के बाद उन्हें शव को लगभग 12 किलोमीटर तक मोटर से चलने वाले ठेले पर रखकर घर ले जाना पड़ा।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक व्यक्ति को ठेले पर महिला का शव ले जाते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में उसका बेटा अपनी मां का चेहरा कपड़े से ढके हुए नजर आ रहा है। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद बादशाह खान (बीके) अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने अस्पताल के आपातकालीन और ट्रॉमा विभागों में किसी भी प्रकार की परिचालन संबंधी खामियों की पहचान करने के लिए जांच के आदेश दिए।

अनुराधा देवी (35) की बुधवार को अस्पताल में टीबी से महीनों तक जूझने के बाद मौत हो गयी।

महिला के पति झुनझुन ने बताया कि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईएमएस) सहित कई अस्पतालों में इलाज पर उनकी सारी जमा पूंजी खर्च हो गई।

झुनझुन ने दावा किया कि पत्नी की मौत के बाद उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों से शव को फरीदाबाद के सरूरपुर गांव स्थित उनके घर ले जाने के लिए शव वाहन या एम्बुलेंस की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था, लेकिन अस्पताल के कर्मचारियों ने ऐसी कोई सुविधा देने से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “मेरे पैसे खत्म हो गए थे इसलिए अस्पताल के एम्बुलेंस कर्मचारियों ने मुझे खुद ही वाहन का इंतजाम करने को कहा। निजी गाड़ियों ने 500 से 700 रुपये मांगे, जो मैं नहीं दे सकता था। मजबूरी में मुझे अपने परिवार के सदस्यों से पत्नी के शव को ले जाने के लिए ठेला की व्यवस्था करने के लिए कहना पड़ा।”

घर 10 से 12 किलोमीटर दूर था और झुनझुन ठेला चला रहा था जबकि उसका बेटा अपनी मां के शव को चादर से ढक रहा था।

परिवार को महिला के अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसियों से पैसे उधार लेने पड़े। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी एम्बुलेंस शवों को ले जाने के लिए नहीं है और ‘रेड क्रॉस’ के माध्यम से शव वाहन उपलब्ध हैं लेकिन इसके लिए औपचारिक अनुरोध की आवश्यकता होती है।

फरीदाबाद रेड क्रॉस के सचिव बिजेंद्र सौरत ने बताया कि अस्पताल परिसर के भीतर ही एम्बुलेंस सेवाओं की व्यवस्था कर दी गई है।

उन्होंने बताया, “नियंत्रण कक्ष से मौत की सूचना मिलने पर वे पीड़ित परिवार की सहायता के लिए शव वाहन उपलब्ध कराते हैं। यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है। इस मामले में, हमारे विभाग को कोई सूचना नहीं मिली।”

बीके अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अगर कर्मचारियों की लापरवाही पाई जाती है तो कार्रवाई की जा सकती है।

डॉ. आहूजा ने बताया, “आरोपों की जांच के लिए प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. राम भगत के नेतृत्व में अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मैं इस मुद्दे पर टिप्पणी करूंगा।”

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अनुराग ढांडा ने शनिवार को हरियाणा में भाजपा सरकार पर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने इस घटना का हवाला देते हुए कहा कि अस्पताल द्वारा परिवहन की व्यवस्था से इनकार किए जाने के बाद एक मजदूर को अपनी पत्नी का शव ठेले पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

एक बयान में ढांडा ने कहा, ‘‘सबसे दर्दनाक दृश्य यह था कि एक 12 वर्षीय बेटा ठेले पर रखे अपनी मां के शव को कपड़े से ढक रहा था। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं है, यह भाजपा सरकार में विफल स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की कड़वी सच्चाई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह दृश्य हरियाणा में भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की असंवेदनशील मानसिकता का आईना है।’’

भाषा जितेंद्र संतोष

संतोष