प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति ने तीन रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय समिति ने तीन रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की लगभग 18,509 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।
इन परियोजनाओं में कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसपेटे के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है।
सरकार ने शनिवार को एक बयान में कहा, ‘‘लाइन की क्षमता में वृद्धि से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।’’
बयान में आगे कहा गया, ‘‘इन ‘मल्टी-ट्रैकिंग’ प्रस्ताव से परिचालन को सुव्यवस्थित करने के साथ भीड़भाड़ को कम किया जा सकेगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘नए भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने वाले व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को ‘आत्मनिर्भर’ बनाएंगी।’’
बयान के अनुसार, ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से विविध माध्यमों से संपर्क और परिवहन संबंधी दक्षता को बढ़ाना है।
ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेंगी।
भारतीय रेलवे नेटवर्क के विस्तार के बारे में जानकारी देते हुए बयान में कहा गया है कि दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों को कवर करने वाली ये तीन परियोजनाएं मौजूदा रेलवे नेटवर्क को लगभग 389 किलोमीटर तक बढ़ा देंगी।
बयान में कहा गया है, ‘‘प्रस्तावित ‘मल्टी-ट्रैकिंग’ परियोजनाओं से लगभग 3,902 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 97 लाख है।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें भावली बांध, श्री घाटंदेवी, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, कटरा में श्री माता वैष्णो देवी, श्रीनगर और हम्पी (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बियर अभयारण्य, तुंगभद्रा बांध, केंचनागुड्डा और विजय विट्ठल मंदिर जैसे प्रमुख आकर्षण शामिल हैं।’’
इसमें कहा गया है, ‘‘परिवहन का एक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा संरक्षण करने वाला साधन होने के नाते रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने, देश में परिवहन लागत को कम करने, तेल आयात (22 करोड़ लीटर) को कम करने और कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन को (111 करोड़ किलोग्राम) कम करने में मदद करेगा, जो चार करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।’’
भाषा संतोष दिलीप
दिलीप

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