(भानु पी. लोहुमी)
शिमला, 15 मई (भाषा) ट्रांसजेंडर समुदाय का प्रमुख चेहरा बन गईं माया ठाकुर ने भारत में इस वर्ग के सामने मौजूद चुनौतियों पर चिंता जताते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर आपराधिक और श्रम कानूनों में संशोधन के लिए ‘‘व्यवस्थागत सुधार पहल’’ की मांग की है।
सोलन जिले में राज्य निर्वाचन आयोग की ‘ट्रांसजेंडर आइकन’ बन गईं माया ठाकुर ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ होने वाला भेदभाव आज भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
युवाओं को दुबई और सऊदी अरब में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की हिमाचल सरकार की हालिया पहल की सराहना करते हुए माया ने कहा, ‘‘आज भी, खासकर उत्तर भारत में किसी ट्रांसजेंडर के लिए सम्मानजनक नौकरी मिलना तो दूर, किराये पर कमरा हासिल करना भी लगभग नामुमकिन है। इसकी वजह समाज में गहरी जड़ें जमा चुका भेदभाव है।’’
पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) को विदेश मंत्रालय ने संयुक्त अरब अमीरात में भोजन और अन्य खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए कंपनी प्रतिनिधि (डिलीवरी राइडर) उपलब्ध कराने तथा विदेशों में रोजगार दिलाने को अधिकृत किया गया था।
जर्मनी और नॉर्वे जैसे यूरोपीय देशों में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अधिक समावेशी कानून और सुरक्षित माहौल का उदाहरण देते हुए माया ने सुझाव दिया कि हिमाचल से ट्रांसजेंडर लोगों की भर्ती के लिए यूरोपीय देशों के साथ विशेष साझेदारी की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे देशों में रोजगार मिलने से समुदाय को सुरक्षा और सम्मान दोनों मिल सकते हैं।
माया ने कहा, ‘‘हममें से कई लोग पढ़ना चाहते हैं, शिक्षक, वकील या पुलिस अधिकारी बनना चाहते हैं, लेकिन जब हम नौकरी के लिए आवेदन करते हैं तो जवाब मिलता है कि आपके लिए कोई योजना होगी तो बताएंगे।’’
सोलन जिले के कुनिहार क्षेत्र के कोठी गांव की निवासी माया ने अपनी पहचान के बारे में कहा, ‘‘मैं जन्म से पुरुष हूं, लेकिन मेरी पहचान स्त्री के रूप में है। मेरी पहचान एक ट्रांसजेंडर महिला की है। हम ‘यूनिसेक्स’ हैं, किन्नर नहीं।’’
माया ठाकुर की ‘हिमाचल प्रदेश सिस्टमिक रिफॉर्म्स इनिशिएटिव’ (एचपीएसआरआई) पहल में आपराधिक कानूनों में संशोधन की मांग की गई है। उनका कहना है कि कानून का डर खत्म होता जा रहा है और मजदूरों का लगातार शोषण हो रहा है।
दिल्ली में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के साथ काम कर चुकीं माया ने अतिरिक्त काम के बदले 100-200 रुपये के मनमाने भुगतान की व्यवस्था खत्म कर कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक दिलाने के लिए सख्त ‘ओवरटाइम कानून’ लागू करने की भी मांग की है।
उन्होंने खाड़ी देशों की तर्ज पर सख्त कानून व्यवस्था लागू करने, दुष्कर्म के मामलों में मृत्युदंड, भ्रष्टाचार को कतई बर्दाशत नहीं करने की नीति अपनाने और भ्रष्टाचार के मामलों के त्वरित निपटारे का भी सुझाव दिया।
उन्होंने तकनीकी कौशल विकास के लिए यूरोपीय इंजीनियरों की नियुक्ति, हिमाचली विद्यार्थियों को यूरोप भेजने और यूरोपीय विशेषज्ञों को प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित करने का प्रस्ताव भी रखा।
माया ने कहा, ‘‘हिमाचल को अब पुरानी नीतियों की नहीं, बल्कि बड़े बदलाव की जरूरत है।’’
भाषा
खारी वैभव
वैभव