क्या दिव्यांगता के कारण अयोग्य हुए कैडेट को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है : न्यायालय ने पूछा
क्या दिव्यांगता के कारण अयोग्य हुए कैडेट को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है : न्यायालय ने पूछा
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या प्रशिक्षण के दौरान लगी चोटों या दिव्यांगता के कारण अयोग्य हो जाने वाले सैन्य कैडेट को पूर्व सैनिक का दर्जा दिया जा सकता है, ताकि वे सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ उठा सकें।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि अधिकांश सैन्य कैडेट की उम्र 30 वर्ष से कम होती है और उन्हें रोजगार की आवश्यकता होगी।
पीठ ने कहा, ‘‘सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि क्या प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकीय कारणों से सेवा से बाहर किए गए कैडेट को भी पूर्व सैनिक या पूर्व सैन्य कर्मी माना जा सकता है, ताकि उन्हें विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों तथा पदों में आरक्षण का लाभ मिल सके।’’
न्यायालय ने कहा, “अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इस पहलू पर निर्देश प्राप्त करें, ताकि पूर्व सैन्य कर्मियों के दायरे में इन कैडेट को भी शामिल किया जा सके, क्योंकि इनमें से अधिकांश 20-30 वर्ष की आयु के हैं।’’
भारत सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक जवाब दिया जाएगा।
शीर्ष न्यायालय इस मामले पर स्वतः संज्ञान सुनवाई कर रहा है, जो प्रशिक्षण के दौरान चोट या दिव्यांगता के कारण बाहर किए गए कैडेट की कठिनाइयों से संबंधित है।
पिछले वर्ष 18 अगस्त को न्यायालय ने कहा था कि रक्षा बलों में ‘‘साहसी कैडेट’’ होने चाहिए, जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान लगी चोट या दिव्यांगता से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। साथ ही, न्यायालय ने केंद्र सरकार को ऐसे मामलों के लिए बीमा कवर देने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और रक्षा बलों से उन कैडेट की समस्याओं पर जवाब मांगा था, जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता के कारण सैन्य संस्थानों से चिकित्सकीय आधार पर बाहर कर दिया गया।
न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार को विभिन्न सैन्य संस्थानों में कठोर प्रशिक्षण ले रहे इन कैडेट के लिए ग्रुप इंश्योरेंस जैसी बीमा योजना लागू करने की संभावना तलाशनी चाहिए, ताकि मृत्यु या दिव्यांगता जैसी आपात स्थितियों से निपटा जा सके।
इसके अलावा, उसने वर्तमान एकमुश्त राशि (प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांग हुए कैडेट को दिए जाने वाले 40,000 रुपये) को बढ़ाने पर भी विचार करने को कहा, ताकि उनकी चिकित्सा जरूरतें पूरी हो सकें।
पिछले वर्ष 12 अगस्त को न्यायालय ने एक खबर पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें इन कैडेट की समस्या को उजागर किया गया था। ये कैडेट देश के प्रमुख सैन्य संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में प्रशिक्षण का हिस्सा रह चुके थे।
खबर के अनुसार, 1985 से अब तक लगभग 500 अधिकारी कैडेट को प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न स्तर की दिव्यांगता के कारण इन संस्थानों से चिकित्सकीय आधार पर बाहर कर दिया गया है। वे अब बढ़ते चिकित्सा खर्चों का सामना कर रहे हैं, जबकि उन्हें मिलने वाली मासिक अनुग्रह राशि उनकी जरूरतों के मुकाबले काफी कम है।
भाषा गोला वैभव
वैभव

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