तिरुवनंतपुरम, 22 जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि राज्य में बिजली संकट का एक प्रमुख कारण पिछली सरकार का वह फैसला था, जिसके तहत ओमान चांडी सरकार द्वारा निजी बिजली उत्पादक कंपनियों के साथ किया गया 25 वर्ष का बिजली खरीद समझौता रद्द कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत राज्य को लगभग 4.29 रुपये प्रति यूनिट की दर से 25 वर्षों तक बिजली मिलनी थी।
उन्होंने कहा कि यह समझौता ओमान चांडी सरकार के एक वर्ष और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के सात वर्षों तक प्रभावी रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह समझौता आज भी लागू होता, तो निजी बिजली कंपनियां हमें बिजली उपलब्ध करातीं और मौजूदा ऊंची दरों पर खुले बाजार से बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।’’
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, खुले बाजार में भी बिजली उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मौसमी परिघटना ‘अल नीनो’ के कारण हर जगह बिजली की मांग बहुत अधिक है।’’
सतीशन ने कहा कि राज्य के जलविद्युत बांधों में जल भंडारण पिछले वर्ष के 61 प्रतिशत की तुलना में घटकर केवल 28 प्रतिशत रह गया है, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष बारिश में 50 से 56 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि राज्य में बिजली की मांग 800 से 1,000 मेगावाट बढ़ गई है।
सतीशन ने कहा कि नई सरकार के सत्ता में आने के एक महीने के भीतर ही यह बिजली संकट पैदा हो गया और सरकार इससे निपटने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने खुले बाजार से लगभग पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से 200 मेगावाट बिजली खरीदी है तथा इससे कम दर पर 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सतीशन ने यह भी कहा कि केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) द्वारा बिजली कटौती की पूर्व सूचना देने में हुई किसी भी चूक या लापरवाही की जांच कराई जाएगी।
भाषा प्रचेता पवनेश
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