CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed: ‘दोपहर तक समाधान नहीं हुआ तो’…. मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सीजेआई सख्त, अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम

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 CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed: 'दोपहर तक समाधान नहीं हुआ तो'.... मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सीजेआई सख्त, अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम

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  • Publish Date - July 23, 2026 / 12:04 PM IST,
    Updated On - July 23, 2026 / 02:52 PM IST

 CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed: 'दोपहर तक समाधान नहीं हुआ तो'.... मेट्रो स्टेशन बंद होने पर सीजेआई सख्त, अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम /image: Social Media

HIGHLIGHTS
  • CJI सूर्यकांत ने कहा- दोपहर तक समाधान नहीं हुआ तो खुद करेंगे हस्तक्षेप
  • छात्रों के प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सहित 16 मेट्रो स्टेशन बंद
  • SCBA ने वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों के लिए सीमित प्रवेश की अनुमति देने की मांग उठाई

नई दिल्ली। CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed: भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) की उस अपील पर संज्ञान लिया कि कई मेट्रो स्टेशन बंद होने से वकीलों और वादियों के लिए अदालत पहुंचना मुश्किल हो गया है। सीजेआई ने कहा कि यदि दोपहर के भोजनावकाश तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह हस्तक्षेप करेंगे।

एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने सुबह ही प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच उच्चतम न्यायालय मेट्रो स्टेशन और अन्य मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने अनुरोध किया कि कम से कम वकीलों, वादियों और न्यायालय कर्मियों को सीमित प्रवेश की अनुमति दी जाए।

प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्होंने निर्देश दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण जिन वकीलों की अदालत में उपस्थिति नहीं हो पा रही है, उनकी अनुपस्थिति के आधार पर किसी भी मामले में कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाए।

CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed बार संघ के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि उच्चतम न्यायालय का वैध प्रवेश पास रखने वाले लोगों को सुरक्षा जांच के बाद ‘सुप्रीम कोर्ट’ मेट्रो स्टेशन पर उतरने की अनुमति दी जाए। इन लोगों में रजिस्ट्री के कर्मचारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्टेशन से बाहर निकलने वाले यात्रियों की सुरक्षा जांच की जा सकती है और केवल वैध प्रवेश कार्ड या उच्चतम न्यायालय का आधिकारिक पहचान पत्र रखने वालों को ही स्टेशन से बाहर जाने दिया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘मेट्रो में एक सुविधा यह है कि जब यात्री ट्रेन से उतरते हैं तो बाहर निकलने का एक निर्धारित स्थान होता है। वहीं उनकी जांच की जा सकती है। जिनके पास वैध प्रवेश कार्ड हैं और रजिस्ट्री के कर्मचारी हैं, उन्हें बाहर आने की अनुमति दी जा सकती है और बाकी लोगों से कहा जा सकता है कि वे दूसरी ट्रेन में बैठकर आगे चले जाएं।’’

मैंने उन्हें सुबह ही इस बारे में बता दिया था..

CJI ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के प्रशासन को इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए पहले ही दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों से बातचीत करने का निर्देश दिया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उन्हें सुबह ही इस बारे में बता दिया था। अब संबंधित अधिकारियों से बात करना उनका काम है। वह इस विकल्प पर भी समाधान के तौर पर विचार कर रहे हैं। यदि दोपहर के भोजनावकाश तक कोई समाधान निकल आता है तो ठीक है। अन्यथा, यदि आवश्यकता हुई तो मैं हस्तक्षेप करूंगा।’’

CJI Surya Kant On Delhi Metro Station Closed यह घटनाक्रम दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) द्वारा बृहस्पतिवार को जारी उस घोषणा के बाद सामने आया है, जिसमें छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सहित 16 मेट्रो स्टेशन को अगले आदेश तक बंद रखने की जानकारी दी गई है।

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CJI सूर्यकांत ने मेट्रो स्टेशन बंद होने पर क्या कहा?

CJI ने कहा कि यदि दोपहर तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे।

कौन-कौन से मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं?

छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के चलते सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन सहित कुल 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद किया गया है।

मेट्रो स्टेशन बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी किसे हुई?

वकीलों, वादियों, सुप्रीम कोर्ट कर्मचारियों और आम यात्रियों को अदालत पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।

SCBA ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?

SCBA ने मांग की कि वैध प्रवेश पास वाले वकीलों, कर्मचारियों और वादियों को सुरक्षा जांच के बाद मेट्रो स्टेशन से निकलने की अनुमति दी जाए।

CJI ने वकीलों को क्या राहत दी?

CJI ने निर्देश दिया कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण अनुपस्थित रहने वाले वकीलों के मामलों में कोई प्रतिकूल आदेश पारित न किया जाए।