डीजीसीए के पूर्व उड़ान प्रशिक्षण निदेशक, विमानन कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज
डीजीसीए के पूर्व उड़ान प्रशिक्षण निदेशक, विमानन कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के एक पूर्व अधिकारी और विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग, चुनिंदा उड़ान प्रशिक्षण संगठनों को अनुचित लाभ पहुंचाने और विमानों के संदिग्ध खरीद फरोख्त मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
प्राथमिकी में नामजद पूर्व डीजीसीए अधिकारी या कंपनियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, जांच में डीजीसीए में उड़ान प्रशिक्षण निदेशक रहे कैप्टन अनिल गिल के करीबी और दूर के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित और संचालित कंपनियों के एक “व्यवस्थित नेटवर्क” का पता चला।
प्राथमिकी के मुताबिक, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2016 में हुई थी और इसमें गिल की मां तथा एक अन्य रिश्तेदार निदेशक थीं। बाद में उनके दो अन्य रिश्तेदार भी कंपनी से जुड़ गए।
प्राथमिकी के अनुसार दो अन्य कंपनियां-सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड-भी स्थापित की गई थीं जिनमें गिल के रिश्तेदार निदेशक थे।
मामला शुक्रवार को गिल, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल, रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी के अलावा अज्ञात सरकारी अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया।
सीबीआई के अनुसार, यह मामला सीबीआई की दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा को 17 अगस्त को मिली एक शिकायत के बाद दर्ज किया गया।
सीबीआई के अनुसार, शिकायत सात अप्रैल, 2025 को दर्ज प्रारंभिक जांच पर आधारित थी जो ग्लोबल एविएनॉटिक्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक कैप्टन जे. एस. ढिल्लों की ओर से गिल के खिलाफ की गई शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसके लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आवश्यक मंजूरी ली गई थी।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उड़ान प्रशिक्षण निदेशक के पद पर रहते हुए गिल ने ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल, रेडबर्ड एविएशन एकेडमी, सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी के निदेशकों एवं शेयरधारकों के साथ मिलीभगत करके ‘‘अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग’’ किया।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनिंदा उड़ान प्रशिक्षण संस्थानों को कथित तौर पर अनुचित सरकारी लाभ पहुंचाया, जिससे समान स्थिति वाले अन्य संचालकों को नुकसान और आर्थिक क्षति हुई।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि गिल ने अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा संचालित “बेनामी/मुखौटा कंपनियों” के जरिए प्रशिक्षण विमानों को बेहद कम कीमत पर खरीदने में मदद की और बाद में इन विमानों को पसंदीदा उड़ान प्रशिक्षण संस्थानों को बहुत ऊंची दरों पर पट्टे पर देने की व्यवस्था की। इसमें आरोप लगाया गया है कि इससे कथित तौर पर ‘‘भारी कमीशन और अवैध आर्थिक लाभ हासिल किया गया,’’ जो गंभीर सरकारी कदाचार के बराबर है।
प्राथमिकी में ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल द्वारा विमानों की कथित संदिग्ध खरीद का भी उल्लेख है। कंपनी ने 2020 में एक सेसना विमान 10 लाख रुपये में और 2021 में दूसरा विमान 37.5 लाख रुपये में खरीदा था।
सीबीआई के अनुसार, दूसरा विमान पूरी तरह चालू स्थिति में था और उसके इंजन ने केवल 123 घंटे काम किया था। एजेंसी के अनुसार इसके बावजूद इसे 75 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर खरीदा गया।
सीबीआई के अनुसार, दोनों विमानों को बाद में गिल द्वारा अपने आधिकारिक नियामकीय अधिकारों के तहत दी गई मंजूरी के आधार पर रेडबर्ड एविएशन अकादमी को पट्टे पर दिया गया।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल ने अकेले रेडबर्ड से 2.16 करोड़ रुपये से अधिक का किराया हासिल किया। सीबीआई ने इसे बहुत कम पूंजी निवेश पर “अनुपातहीन रूप से अधिक लाभ” बताया है।
जांच एजेंसी ने नियामकीय पक्षपात और प्रक्रियागत अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। प्राथमिकी के मुताबिक, रेडबर्ड एविएशन अकादमी को शुरुआती मंजूरी एक महीने और तीन दिन में दे दी गई, जबकि अनुपालन संबंधी कमियों को दूर करने में लगे समय को इसमें शामिल नहीं किया गया है। एजेंसी के अनुसार इसके मुकाबले स्काइनेक्स एयरो और जेट सर्व एविएशन जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को मंजूरी मिलने में चार से छह महीने लगे।
उसने आरोप लगाया है कि गिल ने रेडबर्ड की प्रशिक्षण और प्रक्रिया पुस्तिका को उसकी आधिकारिक स्वीकृति तिथि से पहले ही मंजूरी दे दी। एजेंसी के आरोप के अनुसार वहीं, प्रतिस्पर्धी कंपनी जीएटीआई की विमान शामिल करने की अर्जी को बिना कोई कारण दर्ज किए लंबित रखा गया।
प्राथमिकी के अनुसार, सितंबर 2022 में गिल ने एक चयन समिति की अध्यक्षता की थी, जिसने उनके रिश्ते के भाई विकास नैन को उप मुख्य उड़ान प्रशिक्षक नियुक्त किया। प्राथमिकी के अनुसार बाद में नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब 6.5 लाख रुपये मासिक वेतन पर नौकरी मिल गई।
प्राथमिकी में सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख है। आरोप है कि ये कंपनियां डीजीसीए के उड़ान प्रशिक्षण निदेशक के नियामकीय दायरे में आने वाले प्रशिक्षण संस्थानों को किराये पर दिए गए विमानों के वित्तपोषण और उन्हें गिरवी रखने से जुड़ी थीं।
प्राथमिकी के मुताबिक, बैंक खातों के विवरण में ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल और गिल के परिवार के सदस्यों के बीच कई वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं।
गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों की विमानन क्षेत्र में संलिप्तता और उनके रोजगार का खुलासा नहीं करने का भी आरोप है। सीबीआई के अनुसार, यह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के अनिवार्य आचरण नियमों और डीजीसीए के निर्देशों का उल्लंघन है।
सीबीआई ने कहा कि ‘‘उपलब्ध तथ्य और परिस्थितियां प्रथम दृष्टया ऐसे संज्ञेय अपराध किए जाने का संकेत देती हैं, जिनके लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 11 और 12 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत सजा का प्रावधान है।’’
भाषा अमित नरेश
नरेश

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