खालिस्तान-समर्थक आतंकवादी से जुड़े आतंक-वित्तपोषण नेटवर्क का पर्दाफाश : दिल्ली पुलिस
खालिस्तान-समर्थक आतंकवादी से जुड़े आतंक-वित्तपोषण नेटवर्क का पर्दाफाश : दिल्ली पुलिस
नयी दिल्ली, 23 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर खालिस्तान-समर्थक घोषित आतंकवादी अर्श डल्ला से जुड़े आतंक-वित्तपोषण और हथियार खरीद के लिए मादक पदार्थों का इस्तेमाल करने के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। गिरोह कनाडा में अफीम की तस्करी से कथित तौर पर पैसा जुटाता था, जबकि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार पंजाब भेजे जाते थे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और जांच के दौरान 5.10 किलोग्राम से ज्यादा अफीम बरामद की गई है। जांच की शुरुआत दिल्ली में एक ‘कूरियर पार्सल’ को रोके जाने के बाद हुई थी, जिससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फैले तथा विदेशों तक जुड़े एक नेटवर्क का पता चला।
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) एचजीएस धालीवाल ने एक बयान में कहा, ‘‘इस मामले की कड़ी सात फरवरी से जुड़ी है, जब दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को पुख्ता जानकारी मिली कि दिल्ली में एक कूरियर कंपनी के जरिए कनाडा भेजे जाने वाले पार्सल में खाने-पीने और घरेलू सामान के नीचे छिपाकर नशीले पदार्थ रखे गए थे।’’
उन्होंने बताया कि एक टीम मोती नगर में कूरियर कंपनी के कार्यालय पहुंची और पार्सल को जब्त किया, जिसकी तलाशी लेने पर करीब तीन किलोग्राम अफीम मिली।
अधिकारी ने कहा, ‘‘सिर्फ मादक पदार्थ की बरामदगी तक सीमित रहने के बजाय, कई टीम ने पूरी कूरियर चेन का पता लगाना शुरू किया। उन्होंने भेजने वाले की पहचान की, डिजिटल उपकरण खंगाले, वित्तीय लेन-देन का पता लगाया और तकनीकी सबूतों का विश्लेषण किया।’’
जांच के नतीजे के तौर पर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में छापेमारी की गई, जिससे अफीम की दो और खेप पकड़ी गईं, जिससे कुल बरामदगी 5.13 किलोग्राम हो गई।
अपराध शाखा के अनुसार, बरामद अफीम की कनाडा में अनुमानित कीमत 3.5 करोड़ रुपये है।
गिरफ्तार किए गए चार लोगों की पहचान पंजाब के बरनाला के रहने वाले हरदीप सिंह (28), पंजाब के बठिंडा के सिमरनजीत सिंह (24), हरियाणा के सिरसा के यदविंदर सिंह उर्फ जशन संधू (30) और राजस्थान के बालोतरा के रहने वाले जीवन सिंह (23) के तौर पर हुई है।
पुलिस के मुताबिक, विदेश में तस्करी की जा रही अफीम डल्ला और उसके साथियों के लिए थी। कनाडा में इसे बेचने के बाद, उससे मिली रकम का इस्तेमाल आतंक-वित्तपोषण के लिए किया जाने वाला था।
भाषा शफीक नरेश
नरेश

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