शिगेला को छोड़कर संक्रामक रोगों के मामले पिछले वर्षों की तुलना में अधिक नहीं : मंत्री मुरलीधरन
शिगेला को छोड़कर संक्रामक रोगों के मामले पिछले वर्षों की तुलना में अधिक नहीं : मंत्री मुरलीधरन
तिरुवनंतपुरम, 25 जून (भाषा) केरल के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने कहा है कि राज्य में शिगेला संक्रमण के मामलों को छोड़कर संक्रामक रोगों के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि नहीं हुई है।
मंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति के बिगड़ने संबंधी आशंकाओं को खारिज करते हुए आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया।
बुधवार शाम मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों के रोग निगरानी आंकड़ों की समीक्षा से पता चला है कि वर्ष 2026 में डेंगू, लेप्टोस्पायरोसिस, हेपेटाइटिस-ए और मलेरिया के दर्ज मामलों की संख्या पिछले वर्षों में दर्ज उच्चतम स्तरों की तुलना में कम रही है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले केरल विधानसभा में संक्रामक रोगों के प्रसार को लेकर सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और विपक्षी वाम लोकतान्त्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी।
विपक्ष ने राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में गिरावट आने का आरोप लगाया था और उसका स्थगन प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद सदन से बहिर्गमन किया था।
के मुरलीधरन के अनुसार, शिगेला ही एकमात्र प्रमुख संक्रामक रोग है जिसके मामलों ने वर्ष 2026 में अब तक का सर्वाधिक स्तर दर्ज किया है।
उन्होंने कहा कि अब तक इसके 241 मामले सामने आए हैं और सात लोगों की मौत हुई है। इसके मुकाबले, राज्य में वर्ष 2025 में शिगेला संक्रमण के 65 मामले, 2024 में 60 मामले, 2023 में 48 मामले और 2022 में 53 मामले दर्ज किए गए थे।
मंत्री ने कहा कि डेंगू का सबसे अधिक वार्षिक प्रकोप वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था, जब इसके 88,322 मामले सामने आए थे और 273 लोगों की मौत हुई थी।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष एक जनवरी से 23 जून के बीच केरल में डेंगू के 15,882 मामले दर्ज किए गए और 35 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2024 की इसी अवधि में 25,752 मामले सामने आए थे और 68 लोगों की मौत हुई थी।
मंत्री ने कहा कि लेप्टोस्पायरोसिस के मामले भी पिछले उच्चतम स्तरों से नीचे रहे हैं। इस वर्ष 23 जून तक इसके 1,531 मामले सामने आए और 56 लोगों की मौत हुई, जबकि वर्ष 2024 की इसी अवधि में 1,962 मामले दर्ज किए गए थे और 122 लोगों की मौत हुई थी। पिछले एक दशक में 2024 इस बीमारी के लिहाज से सबसे खराब वर्ष रहा था।
बयान में कहा गया है कि हेपेटाइटिस-ए के वर्ष 2026 में अब तक 9,436 मामले सामने आए हैं और 36 लोगों की मौत हुई है, जो वर्ष 2025 की समान अवधि में दर्ज 15,583 मामलों और 45 मौतों की तुलना में कम है।
मंत्री के कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 23 जून तक मलेरिया के 383 मामले दर्ज किए गए हैं और तीन लोगों की मौत हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में मलेरिया के सबसे अधिक वार्षिक मामले वर्ष 2016 में दर्ज किए गए थे, जबकि इस बीमारी से सबसे अधिक मौत वर्ष 2023 में हुई थी।
भाषा तान्या रंजन
रंजन

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