चेन्नई, छह सितंबर (भाषा) द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को 2027 में होने वाली जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज करने के लिए केंद्र सरकार के प्रस्तावित खुले प्रारूप पर निराशा जताई।
उन्होंने तमिलनाडु सरकार से भी अपील की कि वह विधानसभा के मौजूदा सत्र में लोगों की भावनाओं को दर्शाने वाला एक विशेष प्रस्ताव पारित करे और केंद्र सरकार पर त्रुटिरहित तरीके से जनगणना कराने के लिए जरूरी दबाव बनाए।
स्टालिन ने एक बयान में कहा कि यदि गणनाकर्मियों को बिना किसी मानकीकृत और पहले से निर्धारित सूची के जातियों के नाम खुद दर्ज करने की अनुमति दी जाती है तो इससे बड़ी गड़बड़ियां पैदा होंगी और जाति आधारित जनगणना का मूल उद्देश्य प्रभावित होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘केंद्र सरकार का यह स्पष्टीकरण कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में व्यक्तिगत जातियों के बजाय वर्ग शामिल हैं, पूरी तरह अस्वीकार्य है।’
स्टालिन ने पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के करोड़ों लोगों के सामाजिक न्याय के अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर जोर देते हुए केंद्र सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
भाषा जोहेब नरेश
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