अनिल अंबानी समूह से संबंधित जांच में 73,000 करोड़ रु. की बैंक धोखाधड़ी का सीबीआई का दावा

अनिल अंबानी समूह से संबंधित जांच में 73,000 करोड़ रु. की बैंक धोखाधड़ी का सीबीआई का दावा

अनिल अंबानी समूह से संबंधित जांच में 73,000 करोड़ रु. की बैंक धोखाधड़ी का सीबीआई का दावा
Modified Date: April 6, 2026 / 07:20 pm IST
Published Date: April 6, 2026 7:20 pm IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) रिलायंस अनिल अंबानी समूह के खिलाफ दर्ज सात मामलों में कुल 73,000 करोड़ रुपये की बैंक ऋण धोखाधड़ी की जांच कर रहा है। यह जानकारी उच्चतम न्यायालय में फरवरी में दायर स्थिति रिपोर्ट में दी गई है।

जांच एजेंसी ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि वह इन सात मामलों की जांच कर रही है और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिकाओं की भी छानबीन कर रही है।

सीबीआई और वित्तीय जांच एजेंसी ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ईडी) द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, उच्चतम न्यायालय ने 23 मार्च को एक आदेश जारी किया।

शीर्ष अदालत ने सीबीआई जांच का संदर्भ देते हुए अपने आदेश में कहा, ‘…अन्य मामलों में होने वाले नुकसान भी कई हजार करोड़ रुपये के हैं, जो लगभग 73,006 करोड़ रुपये के कुल दावे बनाते हैं।’’

‘पीटीआई-भाषा’ को इस मामले में रिलायंस समूह को भेजे गए प्रश्न का उत्तर नहीं मिला है।

ईडी ने अदालत को बताया कि उसने कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं, जो कथित ‘‘प्रोजेक्ट हेल्प’’ के बारे में जानकारी देते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि दिवाला कार्रवाई ‘‘जानबूझकर’’ असंबंधित ऋणदाताओं के माध्यम से शुरू की गई थी।

न्यायालय ने ईडी की रिपोर्ट पढ़ने के बाद कहा, ‘‘रिपोर्ट के अनुसार, आईबीसी (दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता) कार्रवाई के तहत अधिग्रहण संबंधी सभी फंडिंग आठ एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के समूह के माध्यम से की गई थी… इस बात का संज्ञान लिया गया कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के दावे का निपटारा केवल 26 करोड़ रुपये में किया गया।’’

ईडी ने अदालत को यह भी सूचित किया कि उसने इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया है और वर्तमान में रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़े आठ मामलों की पड़ताल कर रहा है।

न्यायालय ने कहा, ‘‘जहां तक आरोपों की सच्चाई की बात है, उस पर हम कोई राय नहीं व्यक्त कर रहे, केवल यह कहना चाहते हैं कि सीबीआई और ईडी के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र तरीके से पूरा करें और इसे समयबद्ध तरीके से तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाएं।’’

ईडी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ को यह भी सूचित किया कि उसे इस जांच के संबंध में अन्य जांच एजेंसियों से मांगी गयी कुछ जानकारी ‘‘प्राप्त नहीं हुई’’ है।

इसके बाद शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि सभी एजेंसियों और वित्तीय संस्थानों को ईडी के साथ पूर्ण सहयोग करना चाहिए तथा आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध करानी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

भाषा सुरेश अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में