राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘चेयर प्रोफेसर’ पद सृजित किया

Ads

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘चेयर प्रोफेसर’ पद सृजित किया

  •  
  • Publish Date - June 10, 2026 / 03:27 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 03:27 PM IST

जयपुर, दस जून (भाषा) जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकटों से जूझते प्रदेश में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर ने एक पहल की है। पृथ्वी विज्ञान स्कूल के अंतर्गत ‘चेयर प्रोफेसर’ पद सृजित कर विश्वविद्यालय ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में नई उम्मीद जगाई है।

विश्वविद्यालय ने इस पद के लिए देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों, प्रख्यात शोधकर्ताओं और अकादमिक विशेषज्ञों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।

इस पहल का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, जल संकट, प्रदूषण, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता ह्रास और सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े विषयों पर उच्च स्तरीय अनुसंधान और अकादमिक नेतृत्व प्रदान करना है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि राजस्थान जैसे अर्ध-शुष्क राज्य लंबे समय से जल संकट, भूजल स्तर में गिरावट, मरुस्थलीकरण, सूखा, अनियमित वर्षा, चरम तापमान, हीट वेव, भूमि क्षरण और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।

विश्वविद्यालय का मानना है कि इन जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक नवाचार, तकनीकी हस्तक्षेप और साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण की आवश्यकता है।

प्रस्तावित चेयर प्रोफेसर जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिकी संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों विशेषकर जलवायु कार्रवाई (क्लाइमेट एक्शन) पर शोध करेंगे। उनके मार्गदर्शन में स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं के व्यावहारिक एवं नीति-उन्मुख समाधान विकसित किए जाएंगे।

चेयर प्रोफेसर के साथ चार शोधार्थियों की एक टीम कार्य करेगी। ये शोधार्थी उनके निर्देशन में पर्यावरणीय मुद्दों पर अनुसंधान करेंगे तथा उन्हें नियमानुसार शोधवृत्ति प्रदान की जाएगी।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास आज मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और समाज को सुरक्षित और सतत भविष्य प्रदान करने के लिए उच्च स्तरीय अनुसंधान और अकादमिक नेतृत्व आवश्यक है। ‘चेयर प्रोफेसर’ पद सृजित किया जाना इसी दिशा में एक दूरदर्शी पहल है।”

भाषा बाकोलिया जोहेब

जोहेब