दिल्ली से द्रास तक 1,900 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा से कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

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दिल्ली से द्रास तक 1,900 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा से कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

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  • Publish Date - July 27, 2026 / 11:45 AM IST,
    Updated On - July 27, 2026 / 11:45 AM IST

(कुणाल दत्त)

द्रास, 27 जुलाई (भाषा) कारगिल युद्ध के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से सेवारत सैन्य अधिकारियों और पूर्व सैनिकों के एक दल ने टीम भावना और आपसी भाईचारे का परिचय देते हुए दिल्ली से द्रास तक करीब 1,900 किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा पूरी की।

यह 13 दिवसीय अभियान 14 जुलाई को 1999 के कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से शुरू हुआ था।

कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दल का द्रास में स्वागत किया। इस दौरान पुरुष और महिला मोटरसाइकिल सवार श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित कारगिल युद्ध स्मारक के प्रवेश द्वार से होकर गुजरे। यह वही मार्ग है, जो कारगिल युद्ध के दौरान संघर्ष के प्रमुख केंद्रों में से एक था।

‘‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’’ के ध्येय वाक्य के साथ आयोजित इस ‘शौर्य विजय यात्रा’ की शुरुआत दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से हुई थी। इसमें सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों सहित करीब 30 मोटरसाइकिल सवारों ने हिस्सा लिया।

यात्रा में शामिल प्रतिभागी राष्ट्रीय समर स्मारक की पवित्र मिट्टी एक कलश में अपने साथ लेकर आए थे। यह कलश रक्षा मंत्री को सौंपा गया, जिन्होंने इसे आठवीं माउंटेन डिवीजन को सौंप दिया। यह डिवीजन कारगिल में शहीदों की स्मृति में इस पवित्र मिट्टी को अर्पित करेगी।

यह मोटरसाइकिल अभियान 1999 के ‘ऑपरेशन विजय’ की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा था।

यात्रा के दौरान दल ने उत्तरी हिमालय के दुर्गम पर्वतीय इलाकों से होकर सफर किया, ताकि कारगिल युद्ध में भारत की विजय सुनिश्चित करने वाले सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया जा सके।

दिल्ली में यात्रा को रवाना करते समय राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘‘जब यहां (राष्ट्रीय समर स्मारक) की मिट्टी कारगिल (द्रास स्थित स्मारक) की मिट्टी से मिलेगी, तो यह देश की वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और हमारे वीर सैनिकों के शौर्य के संगम का प्रतीक बनेगी।’’

यात्रा के दौरान मोटरसाइकिल सवारों ने चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक सहित कई प्रमुख सैन्य स्मारकों पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने वीर नारियों से भी मुलाकात की और उनके साहस तथा धैर्य का सम्मान किया। द्रास पहुंचने के बाद सभी प्रतिभागियों ने कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इस अभियान में भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और कारगिल युद्ध के अनुभवी ग्रुप कैप्टन संजय मिश्रा तथा उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा भी शामिल थीं। दोनों ने इस ‘‘असाधारण यात्रा’’ के अपने अनुभव साझा किए।

दोनों का कहना था कि यात्रा के दौरान अलग-अलग प्रकार के दुर्गम रास्तों से गुजरना और लगातार बदलते मौसम का सामना करना सबसे बड़ी चुनौती रही।

मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि इस स्थान पर आना हमेशा भावुक कर देता है, क्योंकि यह ‘‘हमारे शहीद साथियों’’ की स्मृति में बना है।

सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि वह कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा भारतीय सेना को हवाई सहायता उपलब्ध कराने के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का हिस्सा थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। जब भी अवसर मिलता है, मैं यहां आता हूं। यह उन लोगों को याद करने का अवसर है, जिनकी बदौलत हमें शांति मिली है। शांति आसानी से नहीं मिलती, इसकी एक कीमत चुकानी पड़ती है। आज हम दोनों जिस स्थान पर खड़े होकर बात कर रहे हैं, कभी यहां बम गिरते थे। किसी ने अपने बलिदान से यह संभव बनाया है कि आज हम यहां शांति से खड़े हैं।’’

वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त हुए लड़ाकू विमान चालक मिश्रा ने कहा कि इसलिए उन वीरों को याद रखना हमारा कर्तव्य है।

स्मारक के हरे-भरे परिसर में मिग-21 लड़ाकू विमान भी प्रदर्शित किया गया है, जिसे 2013 में वहां स्थापित किया गया था।

मिश्रा ने कहा, ‘‘आप वहां (लॉन में) जो विमान देख रहे हैं, वही विमान मैंने लगभग 15 वर्षों तक उड़ाया था। उसका टेल नंबर भी यही है-सी 1538।’’

भाषा गोला मनीषा

मनीषा