केंद्र ने सिमी के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई पर फैसले के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया

केंद्र ने सिमी के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई पर फैसले के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया

केंद्र ने सिमी के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई पर फैसले के लिए न्यायाधिकरण का गठन किया
Modified Date: February 16, 2024 / 09:30 pm IST
Published Date: February 16, 2024 9:30 pm IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित समूह घोषित किया जा सकता है या नहीं, इस पर फैसला करने के लिए एक न्यायाधिकरण का गठन किया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया है।

केंद्र सरकार ने देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने और शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने में संलिप्तता के लिए सिमी पर लगे प्रतिबंध को 29 जनवरी को पांच वर्ष के लिए बढ़ा दिया था।

गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘अब गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 (1967 का 37) की धारा 4 की उपधारा (1) के तहत धारा 5 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार ने सिमी को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं, इस पर फैसला करने के उद्देश्य से दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अध्यक्षता में न्यायाधिकरण का गठन किया है।’’

सिमी पर प्रतिबंध बढ़ाते हुए सरकार ने कहा था कि यह समूह देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने और शांति एवं सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने में शामिल रहा है।

कम से कम 10 राज्य सरकारों आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश ने यूएपीए के प्रावधानों के तहत सिमी को ‘विधि विरुद्ध संगठन’ घोषित करने की सिफारिश की है।

सिमी पर पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 2001 में प्रतिबंध लगाया गया था। तब से हर पांच साल में प्रतिबंध बढ़ाया जाता रहा है। सिमी पर पिछला प्रतिबंध 31 जनवरी, 2019 को लगाया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा था कि सिमी अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को जारी रखे हुए है और अपने कार्यकर्ताओं को फिर से संगठित कर रहा है, जो अब भी फरार हैं।

अधिसूचना में कहा गया कि यह समूह साम्प्रदायिकता, वैमनस्य पैदा करके, राष्ट्र-विरोधी भावनाओं के प्रचार, उग्रवाद का समर्थन करके देश की अखंडता व सुरक्षा के लिए नुकसानदायक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है और धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहा है।

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव


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