नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा (जेपीएससी) में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को सोमवार को नोटिस जारी किए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य से जवाब मांगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि याचिका में मामले की सीबीआई जांच या उच्चतम न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शीर्ष अदालत ने कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए।
याचिका में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह रिट याचिका जनहित में दायर की गई है, जिसमें झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा 2025 की शुचिता, निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताओं के मद्देनजर इस न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।’’
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सिम्मी मनीषा
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