( फान यांग, मेलबर्न यूनिवर्सिटी )
मेलबर्न, 24 अगस्त (द कन्वरसेशन) रोजगार पैदा करने और खत्म करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका को लेकर जारी चर्चा के बीच यह चिंताजनक हकीकत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है कि एआई के लिए डेटा लेबलिंग का गुमनाम, उबाऊ और अस्थायी होता है जिसे कुशल हाथ अंजाम देते हैं।
जिन कामों को मशीनें अच्छी तरह नहीं कर पातीं, उन्हें अक्सर अस्थिर श्रम बाजारों से जूझ रहे और हाशिये पर मौजूद कामगारों के हवाले कर दिया जाता है। ये लोग दिखने में ‘‘स्वचालित’’ लगने वाला काम भी विषम और शोषणकारी परिस्थितियों में करते हैं।
एआई प्रणालियों के निर्माण और उन्हें बेहतर बनाने में डेटा से जुड़ा काम बेहद महत्वपूर्ण है। एआई मॉडल के कुछ सीखने से पहले मानव डेटा कामगारों को बड़ी मात्रा में पाठ, तस्वीरों, ऑडियो और वीडियो को वर्गीकृत, लेबल, जांच और अन्य जरूरी काम करना पड़ता है, ताकि इन्हें एआई प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
यह काम बढ़ते वैश्विक डिजिटल कार्यबल करते हैं। यह कार्यबल बड़े प्रौद्योगिकी उद्योगों के साथ-साथ बैंकिंग, बीमा, स्वास्थ्य सेवा और रक्षा समेत सरकारी एजेंसियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए भी डेटा तैयार करता है।
एआई कार्यबल को समझने के लिए मैंने चीन और ऑस्ट्रेलिया में एआई मॉडलों के लिए डेटा तैयार करने वाले कामगारों से बातचीत की। यह अध्ययन जारी है, लेकिन अब तक सामने आए अनुभव इस काम की तस्वीर पेश करते हैं।
—– असमानता इस काम का अभिन्न हिस्सा —–
अब तक 10 लोगों से हुई बातचीत से पता चलता है कि अस्थिर श्रम बाजार और हाशिये पर मौजूद सामाजिक स्थिति ने डिजिटल रूप से दक्ष युवा कामगारों को डेटा लेबलिंग उद्योग की ओर धकेला है। एक कामगार ने तंज करते हुए कहा, ‘‘हम हाथ से काम करते हैं ताकि बुद्धिमत्ता का श्रेय उन्हें मिले।’’
डेटा श्रम बाजार में लोगों की योग्यता और उनके भौगोलिक स्थान के आधार पर काफी असमानता है। पीएचडी स्तर या उसके समकक्ष योग्यता तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) से जुड़े प्रमाणपत्र रखने वालों को आमतौर पर अधिक विशेषज्ञता वाले काम मिलते हैं। वैश्विक उत्तर में रहने वाले ऐसे कामगारों को काम के आधार पर प्रति घंटे 400 से 800 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक मिल सकते हैं।
हालांकि, ऐसे विशेषज्ञता वाले और अधिक भुगतान वाले काम दुर्लभ तथा हासिल करना मुश्किल हैं। मेरे संपर्क में आए ज्यादातर कामगार सामान्य काम करते हैं। इनमें ड्रोन, चालक रहित कारों और स्वचालित वेंडिंग मशीनों में इस्तेमाल होने वाली तस्वीरों पर बार-बार बॉक्स बनाकर वस्तुओं को चिह्नित करना या ऑडियो को सुन कर तथ्य निकालना शामिल है।
इन कामगारों को आम तौर पर प्रतिदिन छह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर या उससे भी कम भुगतान मिलता है। यह रकम रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त नहीं है। लंबे समय तक काम करने से आंखों में लगातार तनाव और पीठ दर्द जैसी समस्याएं भी होती हैं।
—– गिग अर्थव्यवस्था का हिस्सा —–
डेटा से जुड़ा यह काम गिग अर्थव्यवस्था की अन्य कम विनियमित नौकरियों से बहुत अलग नहीं है। असंगठित क्षेत्र के अस्थायी कामगारों को गिग वर्कर कहा जाता है जिनके पास सामाजिक सुरक्षा नहीं होती।
कामगारों के पास औपचारिक अनुबंध नहीं होते और वे कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत नहीं किए जाते। उन्हें ‘‘यूजर’’ कहा जाता है और प्लेटफॉर्म उनकी विशेषज्ञता तथा पिछले काम के रिकॉर्ड के अनुरूप काम उपलब्ध होने पर ही उनसे संपर्क करते हैं।
यूजर समझौते मुख्य रूप से आउटसोर्सिंग करने वाली कंपनियों के हितों की रक्षा करते हैं। मसलन, कामगारों को उनके सामने आने वाली जानकारी का खुलासा नहीं करने की शर्त होती है।
यह स्थिति तब है जब डेटा सेट पहले ही गुमनाम किए जा चुके होते हैं। कामगारों को अक्सर यह भी पता नहीं होता कि वे किस कंपनी के लिए डेटा लेबल कर रहे हैं। उन्हें यह तक मालूम नहीं होता कि उनके काम का आकलन इंसान कर रहे हैं या एआई एजेंट। प्रदर्शन के आकलन को चुनौती देने या उसके खिलाफ अपील करने के अधिकार भी उनके पास बेहद सीमित हैं।
सभी साक्षात्कारकर्ताओं ने बताया कि एआई के विकास के साथ उन्हें कम काम मिलने लगा है। जो काम बचा है, वह अधिक कठिन और समय लेने वाला है।
साक्षात्कारकर्ताओं को इस बात की खास चिंता नहीं थी कि अंततः एआई उनकी नौकरियां ले लेगा। लेकिन यह उदासीनता निराशावादी सोच से उपजी थी।
एक कामगार ने कहा, ‘‘अगर मैं यह पैसा नहीं कमाऊंगा तो कोई और कमाएगा और आखिरकार मेरी जगह एआई ले ही लेगा।’’
एक अन्य कामगार के मुताबिक, एआई का वास्तविक असर कामगार वर्ग पर पड़ रहा है। मौजूदा अस्थिर रोजगार बाजार के कारण अधिक पेशेवर लोग भी डेटा लेबलिंग की ओर जा रहे हैं और इस तरह यह कामगार वर्ग बढ़ रहा है।
—– पूरा काम, बेहद कम भुगतान —–
कामगार को किस तरह भुगतान किया जाएगा, यह प्लेटफॉर्म तय करता है। अमेरिका के क्राउडसोर्सिंग प्लेटफॉर्म आम तौर पर अधिक भुगतान वाले काम देते हैं और काम जमा करते ही भुगतान कर देते हैं।
चीन के प्लेटफॉर्म या कंपनियां अक्सर काम पूरा होने और तय मानकों पर खरा उतरने की पुष्टि के बाद ही भुगतान करती हैं। इसके चलते कामगार कई घंटे काम करने के बाद भी बिना भुगतान के रह जाते हैं।
इसके अलावा, चीन के कामगार अमेरिकी प्लेटफॉर्म तक पहुंच नहीं बना सकते। वीपीएन के जरिये इस पाबंदी को दरकिनार करने पर उनका खाता प्रतिबंधित होने का खतरा रहता है।
कंपनियां अपने कार्यबल में स्थिरता चाहती हैं क्योंकि कर्मचारियों का बार-बार बदलना महंगा पड़ता है। किसी काम को शुरू करने से पहले कामगारों को निर्देश और प्रशिक्षण देना पड़ता है तथा काम में दक्ष होने में भी समय लगता है।
कामगार आम तौर पर इस भूमिका में जितने लंबे समय तक रहते हैं, उतने ही तेजी से काम करने लगते हैं। इसलिए कंपनियां अनुभवी कामगारों को बनाए रखना चाहती हैं। लेकिन कम भुगतान के कारण कई कामगार नौकरी छोड़ देते हैं।
इसकी भरपाई के लिए कंपनियों ने अधिक कमजोर वर्गों के लोगों की भर्ती शुरू कर दी है। इसका एक उदाहरण स्थानीय सरकारी पहलों के साथ मिलकर दिव्यांग लोगों को रोजगार देना है। ऐसे कामगारों के नौकरी छोड़ने की संभावना कम होती है क्योंकि कई बार यह नौकरी उनके लिए अंतिम विकल्प होती है।
कामगारों ने बताया कि दिव्यांगता, गर्भावस्था या हाल में स्नातक होने के कारण उन्हें दूसरी नौकरी नहीं मिल रही थी या वे पूर्णकालिक रोजगार की तलाश में थे।
—– बड़ी तस्वीर चिंताजनक —–
एआई अर्थव्यवस्था ने रोजगार पैदा किए हैं। लेकिन इनमें से कई कामों में इंसानी कामगारों को मशीनों की गलतियां सुधारनी पड़ती हैं और ऐसे कार्य करने पड़ते हैं जिन्हें मशीनें बहुत कठिन या अस्पष्ट होने के कारण हल नहीं कर पातीं। कई बार यह काम उन कार्यों की तुलना में मानसिक और भावनात्मक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, जिनकी जगह इसने ली है।
कामगारों को यह भी पता नहीं होता कि वे इंसानी प्रबंधकों को जवाब दे रहे हैं या एआई एजेंटों को। इससे सामूहिक सौदेबाजी का उनका अधिकार और कमजोर होता है।
डेटा कामगार एआई अर्थव्यवस्था की ऐसी इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाने वाली बैटरियों की तरह हैं, जिनसे पूरी ऊर्जा निकाल लेने के बाद उन्हें उस समय छोड़ दिया जाता है जब वे उस प्रणाली को चलाने में सक्षम नहीं रह जाते, जिस पर वह निर्भर थी।
एआई से मिलने वाला रोजगार लाभ केवल अल्पकालिक हो सकता है और इसकी कीमत डेटा कामगारों के जीवन की गुणवत्ता तथा कल्याण को चुकानी पड़ सकती है। इस कार्यबल के लिए सुरक्षा उपाय और दीर्घकालिक योजना तैयार करने की जरूरत है, ताकि नुकसान होने के बाद केवल उसका जवाब देने के बजाय पहले ही उसे रोका जा सके।
द कन्वरसेशन
मनीषा वैभव
वैभव