नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के सर्किट हाउस का कमरा खाली कराने के मामले में सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आवंटन के बावजूद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें कमरा खाली करने के लिए मजबूर किया।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष मोइत्रा के वकील ने बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र कृष्णनगर में यह घटना देर रात हुई।
उनके वकील ने पीठ से कहा, ‘‘इस मामले की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है। उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षण आदेश जारी किए जाने के बावजूद ऐसा हुआ है। मैं केवल शीघ्र सुनवाई की तारीख देने का अनुरोध कर रहा हूं, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा है।’’
इससे पहले, 14 अगस्त की रात मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि सर्किट हाउस खाली करने से इनकार करने पर परिसर के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे और ‘‘जय श्री राम’’ के नारे लगा रहे थे।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कमरा आवंटित किए जाने के बावजूद नादिया जिला प्रशासन द्वारा सर्किट हाउस खाली कराने के कथित प्रयास में हस्तक्षेप की मांग की थी। कृष्णनगर की सांसद ने इस कथित उत्पीड़न को लेकर अदालत जाने की चेतावनी भी दी थी।
संसद सत्र के बाद मोइत्रा रात्रि विश्राम के लिए कृष्णनगर सर्किट हाउस पहुंची थीं।
उन्होंने कहा था कि एक सांसद के तौर पर वहां ठहरना उनका अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला अधिकारियों ने उन्हें परेशान करने की मंशा से आधी रात को कमरा खाली करने के लिए दबाव बनाया।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में उन्होंने दावा किया कि कमरा आरक्षित कराते समय प्रशासन ने उन्हें किसी रोक या प्रतिबंध की जानकारी नहीं दी थी और न ही सर्किट हाउस पहुंचने पर इस बारे में बताया गया।
मोइत्रा ने कहा कि यह परिसर जिला पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी के सरकारी आवास के ठीक सामने स्थित है और एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है।
भाषा खारी वैभव
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