(8th Pay Commission News/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: 8th Pay Commission News: 8वां वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में (8th Pay Commission News) बैठक करेगा। इससे पहले आयोग पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और लद्दाख में कर्मचारियों व अन्य हितधारकों से बातचीत कर चुका है। इन बैठकों में वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी मांगों पर चर्चा हो रही है।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission News) केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों तथा पेंशन की समीक्षा कर रहा है। आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था। माना जा रहा है कि यह करीब 18 महीने बाद यानी मई-जून 2027 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।
7वें वेतन आयोग ने पुराने पे बैंड और ग्रेड पे सिस्टम को हटाकर Pay Matrix लागू किया था। इसमें कर्मचारियों को अलग-अलग पे लेवल में रखा गया। अब 8वां वेतन आयोग मौजूदा पे लेवल, न्यूनतम वेतन और वेतन बढ़ने की व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश कर सकता है।
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसका मतलब सीधे तौर पर 157% वेतन बढ़ना नहीं था, क्योंकि इसमें महंगाई भत्ते का असर भी शामिल था। अब कर्मचारी संगठन 3.5 से 4 गुना तक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की आर्थिक स्थिति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे को 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह किया गया था। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission News) में न्यूनतम वेतन बढ़ने पर पूरे Pay Matrix पर असर पड़ सकता है। इससे कर्मचारियों की कुल सैलरी में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
7वें वेतन आयोग ने 197 भत्तों की समीक्षा की थी। इनमें 53 भत्ते खत्म करने और 37 को दूसरे भत्तों में मिलाने की सिफारिश की गई थी। HRA में भी बदलाव हुआ था। वहीं, सालाना इंक्रीमेंट 3% पर बरकरार रखा गया था। 8वां आयोग इन व्यवस्थाओं को जारी रख सकता है या नया ढांचा सुझा सकता है।
8वें वेतन आयोग से उम्मीदें सिर्फ फिटमेंट फैक्टर (8th Pay Commission News) तक सीमित नहीं हैं। कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी पर बेसिक पे, Pay Matrix, HRA, दूसरे भत्ते और सालाना इंक्रीमेंट का भी असर पड़ेगा। वहीं, जयपुर के अलावा चंडीगढ़, पुडुचेरी और चेन्नई में होने वाली बैठकों में कर्मचारियों और संगठनों की मांगों से आयोग की दिशा को लेकर और संकेत मिल सकते हैं।