केंद्र ने उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नियम अधिसूचित किए

केंद्र ने उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नियम अधिसूचित किए

केंद्र ने उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नियम अधिसूचित किए
Modified Date: January 15, 2026 / 08:26 pm IST
Published Date: January 15, 2026 8:26 pm IST

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) केन्द्र सरकार द्वारा नए नियम अधिसूचित करने के बाद सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जातिगत भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए ‘समानता समितियां’ गठित करना अनिवार्य है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 में यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों के सदस्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), महिलाएं और दिव्यांग व्यक्ति शामिल होने चाहिए।

पिछले साल फरवरी में प्रतिक्रिया के लिए नियमों का मसौदा सार्वजनिक किया गया था।

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यह दस्तावेज तब जारी किया गया जब उच्चतम न्यायालय ने रोहित वेमुला और पायल ताडवी की माताओं द्वारा 2012 के यूजीसी नियमों के कार्यान्वयन पर सवाल उठाने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए यूजीसी को नए नियम प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

अधिसूचना के अनुसार, ‘प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को वंचित समूहों के लिए नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने, शैक्षणिक, वित्तीय, सामाजिक और अन्य मामलों में मार्गदर्शन और परामर्श प्रदान करने और परिसर में विविधता को बढ़ावा देने के लिए समान अवसर केंद्र स्थापित करना होगा।’

अधिसूचना में कहा गया है, ‘यदि किसी कॉलेज में समान अवसर केंद्र स्थापित करने के लिए कम से कम पांच संकाय सदस्य नहीं हैं, तो कॉलेज के केंद्र के कार्य उस विश्वविद्यालय के समान अवसर केंद्र द्वारा किए जाएंगे जिससे कॉलेज संबद्ध है।’

भाषा

राखी अविनाश

अविनाश


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