उत्तर प्रदेश में जर्जर धरोहर स्थलों को लेकर केंद्र, राज्य से जवाब तलब

उत्तर प्रदेश में जर्जर धरोहर स्थलों को लेकर केंद्र, राज्य से जवाब तलब

Modified Date: May 26, 2026 / 10:48 pm IST
Published Date: May 26, 2026 10:48 pm IST

प्रयागराज, 26 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में झांसी, वृंदावन, आगरा और लखनऊ जैसे विभिन्न स्थानों पर धरोहर स्थलों की जर्जर स्थिति को संज्ञान में लेते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार को छह सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, पर्यटन मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग को नोटिस जारी किया है।

अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सोमवार के अपने आदेश में विभागों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई अमूल्य धरोहर स्थल और ढांचे संबंधित अधिकारियों की उपेक्षा की वजह से खंडहर और जर्जर ढांचों में तब्दील हो रहे हैं।

याचिका में कहा गया कि पूरे राज्य में करीब 3500 पुरातत्व धरोहर स्मारक और प्राचीन स्थल मौजूद हैं जो पूरी तरह से असुरक्षित हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इनमें से केवल 212 स्थल राज्य के पुरातत्व विभाग द्वारा कथित तौर पर संरक्षित हैं।

‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज’ (इनटैक) के मुताबिक, पूरे राज्य में 5,416 धरोहर-ऐतिहासिक भवन हैं। हालांकि, इनमें से केवल 412 धरोहर स्थलों का संरक्षण किया जा रहा है जिसमें राज्य के पुरातत्व विभाग द्वारा 212, एएसआई, आगरा द्वारा 154 और एएसआई लखनऊ द्वारा 55 का संरक्षण किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि शेष 4,995 प्राचीन ढांचे जर्जर स्थिति में हैं और अस्तित्व खोने के कागार पर हैं। इनटैक द्वारा सूचीबद्ध इन सभी धरोहर ढांचों को संबंधित विभागों द्वारा संरक्षित किए जाने की अत्यंत आवश्यकता है। केंद्र और राज्य सरकार की प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत इन ढांचों को संरक्षित करने की जिम्मेदारी है।

भाषा सं राजेंद्र शोभना

शोभना


लेखक के बारे में