केंद्र कमजोर लोगों की रक्षा करें, साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों से अवगत कराएं : न्यायालय
केंद्र कमजोर लोगों की रक्षा करें, साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों से अवगत कराएं : न्यायालय
नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि सरकार को साइबर घोटालों में अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले कमजोर लोगों को जागरूक करना चाहिए, मुआवजा देना चाहिए और उनकी रक्षा करने का प्रयास करना चाहिए।
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने परमजीत नाम के व्यक्ति को जमानत देते हुए ये टिप्पणियां कीं।
इस व्यक्ति पर ऑनलाइन घोटाले के पीड़ितों से जबरन वसूली किये गए पैसे को जमा करने के लिए फर्जी बैंक खाते खोलने और उन्हें कथित साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस डी संजय से कहा कि सरकार और पुलिस को ऐसे मामलों में अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले कमजोर लोगों, विशेष रूप से बुजुर्ग व्यक्तियों को मुआवजा देने और उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको जनता को जागरूरक करना होगा। टीवी और रेडियो पर उन रिकॉर्डिंग को प्रसारित करें, जिनमें बताया गया हो कि ये साइबर अपराधी किस तरह से काम करते हैं। वे ज्यादातर बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं और उन्हें उनके तौर-तरीकों से अवगत कराया जाना चाहिए।’’
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ने कहा कि ये साइबर अपराधी बहुत चालाक हैं और वह खुद भी एक बार इनका शिकार होते-होते बचे थे। एएसजी ने पीठ को बताया कि सरकार ने ‘‘संचार साथी’’ ऐप शुरू किया है, जिसपर लोग किसी भी साइबर अपराध, चोरी हुए मोबाइल फोन या चोरी हुई पहचान की रिपोर्ट कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘लोगों को दिखाइए कि ये जालसाज कैसे काम करते हैं और ये धोखाधड़ी कैसे की जाती है। लोगों को समझाइए कि इस तरह की चीजें आपके समक्ष आएंगी, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करें। जनता को साइबर सुरक्षा, कानूनी जागरूकता और अन्य चीजों के बारे में बताया जाए। जागरूकता ही कुंजी है।’’
भाषा सुभाष रंजन
रंजन

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