केंद्र ने क्रीमी लेयर के मानदंड पर शीर्ष अदालत के फैसले को भावी प्रभाव से लागू करने का आग्रह किया
केंद्र ने क्रीमी लेयर के मानदंड पर शीर्ष अदालत के फैसले को भावी प्रभाव से लागू करने का आग्रह किया
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को 11 मार्च के अपने उस फैसले को भविष्य के प्रभाव से लागू करने की केंद्र सरकार की याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि किसी पीएसयू या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता या पिता के वेतन या आय को अकेले ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए ‘क्रीमी लेयर’ से बाहर रखने का आधार नहीं माना जा सकता।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से आग्रह किया कि फैसले को भावी प्रभाव से लागू किया जाए। उन्होंने अदालत के तय किए गए कानून को लागू करने और पुरानी व चालू भर्ती प्रक्रियाओं में रुकावट को रोकने के लिए दो साल का समय मांगा।
शीर्ष अदालत ने विधि अधिकारी की इस बात का संज्ञान लिया कि अलग-अलग उच्च न्यायालयों ने इस फैसले से जुड़ी याचिकाओं पर विचार किया है।
भाटी ने कहा कि केंद्र ने अलग-अलग उच्च न्यायालयों से मामलों को उच्चतम न्यायालय या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए याचिका दायर की है।
भारत सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में, उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को फैसला सुनाया था कि किसी विद्यार्थी के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या निजी क्षेत्र में कार्यरत पिता या माता के वेतन या आय को अकेले ही ‘क्रीमी लेयर’ से बाहर रखने का आधार नहीं माना जा सकता।
माता-पिता के पद का स्तर और श्रेणी, साथ ही तय आय या संपत्ति आकलन को 1993 के कार्यालय ज्ञापन के अनुसार देखा जाना था।
भाषा वैभव अविनाश
अविनाश

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