चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामला ‘सुनियोजित साजिश’ था, नाबालिग से कोई दुष्कर्म नहीं हुआ: पुलिस

चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामला 'सुनियोजित साजिश' था, नाबालिग से कोई दुष्कर्म नहीं हुआ: पुलिस

चंपावत सामूहिक दुष्कर्म मामला ‘सुनियोजित साजिश’ था, नाबालिग से कोई दुष्कर्म नहीं हुआ: पुलिस
Modified Date: May 7, 2026 / 10:08 pm IST
Published Date: May 7, 2026 10:08 pm IST

चंपावत, सात मई (भाषा) उत्तराखंड के चंपावत में एक नाबालिग लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला पुलिस जांच में एक ‘सुनियोजित साजिश’ निकला जो पीड़िता के एक रिश्तेदार ने उसे उसके बीमार पिता का इलाज कराने का प्रलोभन देकर प्रकरण में आरोपी बनाए गए लोगों से ‘बदला लेने की नीयत’ से रचा।

चंपावत की पुलिस अधीक्षक (एसपी) रेखा यादव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस साजिश में 16 वर्षीया लड़की के रिश्तेदार कमल रावत की महिला मित्र भी शामिल थी, जिसने बुधवार तड़के पुलिस को फोन कर लड़की की गुमशुदगी की जानकारी दी थी।

इस मौके पर एसपी के साथ मौजूद रहे चंपावत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देवेश चौहान ने बताया कि मेडिकल परीक्षण में लड़की के साथ किसी प्रकार के दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और न ही उसके शरीर पर किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोटों के निशान पाए गए।

चंपावत के सल्ली गांव में लड़की से हथियारों के बल पर कथित सामूहिक दुष्कर्म होने तथा रस्सियों से बंधी हालत एवं निर्वस्त्र अवस्था में बरामद होने का मामला सामने आने से हडकंप मच गया था।

चंपावत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विधानसभा क्षेत्र होने तथा घटना में नामजद किए गए कथित आरोपियों में से एक का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंध होने के कारण विपक्षी दल कांग्रेस भी मामले में खासी हमलावर थी जिसने प्रदेश में कई जगह विरोध प्रदर्शन किए।

यादव ने बताया कि लड़की के पिता की शिकायत पर पूरन सिंह रावत, नवीन रावत तथा विनोद रावत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 70 (2) (नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म), 127(2), 351(2) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गयी।

उन्होंने बताया कि मामला दर्ज करने के बाद मौके का मुआयना किया गया तथा फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य संकलन की कार्रवाई की गयी। इसके बाद अस्पताल ले जाकर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।

एसपी ने बताया कि चंपावत क्षेत्राधिकारी के पर्यवेक्षण में गठित की गयी 10 सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा जांच के दौरान इकटठा किए गए मामले से जुड़े प्रमाण और सीसीटीवी फुटेज तथा पीड़िता द्वारा बताई गयी घटना में भिन्नता पायी गयी।

उन्होंने बताया कि पीड़िता तथा उसके साथ गवाहों के बयान और तकनीकी जानकारी में भी विरोधाभास पाया गया जिससे घटना की सत्यता को लेकर संदेह पैदा हुआ। एसपी ने बताया कि इसके बाद पीड़िता से दोबारा बात की गयी तो उसने भी माना कि घटना जैसी बतायी गयी, वह नहीं थी।

यादव ने कहा, ‘‘पूर्व में एक मामले में आरोपी रहे कमल रावत के मन में अपने विरूद्ध पैरवी करने वाले लोगों के प्रति बदले की भावना थी, इसलिए उसने साजिश करके पूरा घटनाक्रम रचा। साजिश में कमल रावत की महिला मित्र भी शामिल थी।’’

उन्होंने कहा कि घटना में नाबालिग पीड़िता का इस्तेमाल बदले की भावना की पूर्ति के लिए किया गया और उसकी कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए उसे उसके बीमार पिता का इलाज कराने का प्रलोभन दिया गया।

एसपी ने कहा कि योजना का क्रियान्वयन करने के लिए पीड़िता के दोस्त की शादी समारोह का दिन चुना गया। उन्होंने बताया कि समारोह खत्म होने के बाद साजिशकर्ताओं का पीड़िता के दोस्त विनोद रावत के घर जाकर वहीं पूरी साजिश को अंजाम देने का इरादा था। हालांकि, विनोद समारोह से पहले ही चला गया जिसके बाद उन्होंने गांव में डेयरी के निकट विनोद के एक परिचित नवीन रावत के खाली पड़े आवास को चुना जिसके एक कमरे में ताला नहीं था।

पुलिस अधीक्षक ने तहरीर में नामजद आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए कहा, ‘‘उन व्यक्तियों की मौके पर मौजूदगी की न तो तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर और न ही स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि हुई। वे घटनास्थल के निकट भी नहीं थे और उनकी मौजूदगी अन्यत्र कहीं पायी गयी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह दुष्कर्म नहीं षड्यंत्र था, जिसका हमने भंडाफोड़ कर दिया है। जिन लोगों ने भी यह पूरा षड्यंत्र रचा है, उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।’’

एसपी ने कहा कि अभी मामले में किसी की गिरफतारी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता द्वारा अदालत में भी यह स्वीकार किया है कि पूरा घटनाक्रम एक षड्यंत्र था और नामजद आरोपियों द्वारा कोई दुष्कर्म नहीं किया गया।

एसपी ने बताया कि पीडिता की मां का बचपन में ही देहांत हो गया था जबकि पिताजी चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पीड़िता नाबालिग है जिसे मोहरा बनाकर इस्तेमाल किया गया और यह देखा जाएगा कि कैसे उसे मदद दी जा सकती है।

मुख्य साजिशकर्ता करीब दो साल पहले कथित दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी था।

चंपावत के सीएमओ ने कहा कि पीड़िता को बुधवार सुबह जिला अस्पताल लाया गया था जहां चिकित्सकीय जांच में उसके शरीर पर किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट या संघर्ष के निशान नहीं पाए गए हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘उसके शरीर पर रस्सी के निशान भी नहीं थे। केवल दाहिने हाथ की कलाई पर एक निशान था जो तीन दिन पुराना था।’’

भाषा दीप्ति आशीष

आशीष


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