रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट से शबरिमला में सोने की प्लेट बदले जाने की आशंकाओं को बल मिला है : अदालत

रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट से शबरिमला में सोने की प्लेट बदले जाने की आशंकाओं को बल मिला है : अदालत

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 09:59 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 09:59 PM IST

कोच्चि, 19 जनवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट से शबरिमला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में ‘द्वारपालकों’ की मूर्तियों और ‘श्रीकोविल’ के मुख्य द्वार की चौखट पर चढ़ी सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों को बदले जाने की उसकी आशंकाओं को और भी बल मिला है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की खंडपीठ ने अय्यप्पा मंदिर से सोना गायब होने से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही एसआईटी की ओर से दायर प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह टिप्पणी की।

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जांच में हुई प्रगति का विस्तृत विवरण देते हुए एक वस्तुस्थिति रिपोर्ट सोमवार को पेश की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि द्वारपालकों (संरक्षक देवता) की मूर्तियों और श्रीकोविल (मंदिर के गर्भगृह का वह स्थान है, जहां भगवान अयप्पा की मूर्ति स्थापित की गई है) के दरवाजे की चौखट पर चढ़ी सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों से सोना गायब होने के दो मामलों में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की सक्रिय रूप से जांच की जा रही है।

उच्च न्यायालय ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की विश्लेषण रिपोर्ट पर भी गौर किया, जिसने सोने की परत चढ़ी विभिन्न प्लेटों से एकत्र किए गए नमूनों की रासायनिक जांच की थी।

खंडपीठ ने कहा, “हमने जांच एजेंसी की ओर से पेश विश्लेषण रिपोर्ट का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। इस स्तर पर जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि 1998 में मूल रूप से कितनी मात्रा में सोने की परत चढ़ाई गई थी, वर्ष 2019 के दौरान बाद में चढ़ाई गई परत में कितना सोना इस्तेमाल किया गया था और क्या सोने की परत वाली मूल प्लेटों को हटाकर उनकी जगह नयी प्लेटें चढ़ाई गई थीं।”

खंडपीठ ने कहा कि वीएसएससी की रिपोर्ट अत्यधिक तकनीकी प्रकृति की थी, इसलिए संस्थान के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के विस्तृत बयान दर्ज करने होंगे।

हालांकि, उसने कहा कि रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट ने अदालत की ओर से पहले जताई गई आशंका को और प्रबल किया है।

खंडपीठ ने कहा, “सोने की परत चढ़ी मूल प्लेटों में निकेल और ऐक्रेलिक पॉलिमर परतों की अनुपस्थिति, बाद में चढ़ाई गई तांबे की प्लेटों में निकेल की मौजूदगी, पारे की अनुपस्थिति और ऐक्रेलिक पॉलिमर परतों की उपस्थिति, साथ ही सोने और निकेल की परतों की तुलनात्मक मोटाई, स्पष्ट रूप से एक व्यवस्थित और सुनियोजित प्रक्रिया का संकेत देती है, जिसके तहत कथित अपराध को अंजाम दिया गया प्रतीत होता है।”

उसने कहा कि विश्लेषण रिपोर्ट ने न केवल कथित छेड़छाड़ और प्रतिस्थापन के तरीके एवं कार्यप्रणाली का खुलासा किया है, बल्कि अतीत के लेन-देन को बाद की गतिविधियों से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्रदान किए हैं।

खंडपीठ ने कहा, “इसलिए विश्लेषण रिपोर्ट जांच में केंद्रीय महत्व रखती है, क्योंकि यह कई तकनीकी और भौतिक पहलुओं पर प्रकाश डालती है और वर्ष 2024 व 2025 के दौरान किए गए लेन-देन का मूल्यांकन करने, निर्णय लेने की शृंखला की पहचान करने, व्यक्तिगत जिम्मेदारी और आपराधिक दायित्व तय करने तथा आपराधिक साजिश के बराबर किसी भी संगठित या समन्वित कार्रवाई के अस्तित्व की जांच करने के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है।”

जांच की संवेदनशीलता और आगे और गिरफ्तारियों एवं बरामदगी की संभावना को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस स्तर पर अतिरिक्त विवरणों का खुलासा करने से परहेज करेगी।

खंडपीठ ने एसआईटी को वीएसएससी के विशेषज्ञों, विश्लेषकों और तकनीकी कर्मियों के बयान जल्द से जल्द दर्ज करने तथा विश्लेषण के निष्कर्षों एवं पहले जुटाए गए भौतिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के बीच की कड़ी का पता लगाने का निर्देश दिया।

अदालत ने 2017 में नये ध्वज स्तंभ (कोडिमारम) के प्रतिस्थापन का भी जिक्र किया। उसने कहा कि पुराने कोडिमारम पर लगे ध्वज स्तंभ की बाहरी सतह पर काफी मात्रा में सोना जड़ा हुआ था, जिसे कथित तौर पर तांत्रिक (मुख्य पुजारी) कंदारारू राजीव को सौंप दिया गया था। राजीव को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।

खंडपीठ ने कहा कि उसके समक्ष पेश सामग्री से लेन-देन से संबंधित संदिग्ध एवं परेशान करने वाली चीजें सामने आई हैं, जो वैज्ञानिक निष्कर्षों और अन्य महत्वपूर्ण खुलासों के मद्देनजर अधिक गहन, व्यापक और विस्तृत जांच की आवश्यकता को दर्शाती हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, “जांच ने वास्तव में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर की हैं, जो अब तक छिपी हुई थीं। इसमें परेशान करने वाले कई पहलुओं का खुलासा हुआ है, जिनकी व्यापक और व्यवस्थित जांच की आवश्यकता है।”

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि 2024-2025 के दौरान सोने की परत चढ़ाने के काम और उससे संबंधित लेन-देन की गहन जांच की जानी चाहिए।

उसने एसआईटी को मंगलवार को शबरिमला मंदिर का दौरा करने और भंडारगृह में रखे दो दरवाजों के सतही क्षेत्रफल को मापने का निर्देश दिया, ताकि दरवाजों के चौखट पर चढ़े सोने की मात्रा की गणना की जा सके।

उच्च न्यायालय ने कहा, “चूंकि, मंदिर बंद है, इसलिए एसआईटी को दरवाजों के चौखट पर चढ़ी सोने की परत वाली तांबे की प्लेटों से नमूने एकत्र करने और सोने की मात्रा निर्धारित करने के लिए आवश्यक माप एवं मूल्यांकन करने की अनुमति दी जाती है।”

खंडपीठ ने एसआईटी को वीएसएससी के वैज्ञानिकों और तकनीकी टीम के विस्तृत बयान दर्ज करने की अनुमति दी, ताकि कथित रूप से चुराए गए सोने की मात्रा का पता लगाया जा सके।

अदालत ने एसआईटी में दो और अधिकारियों को शामिल करने की भी अनुमति दे दी। उसने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ फरवरी की तारीख तय की और तब तक एक व्यापक वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

भाषा पारुल दिलीप

दिलीप