Independence Day 2026: राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, स्वतंत्रता दिवस पर होगा विशेष आयोजन, जनजातीय विरासत की होगी विशेष प्रस्तुति

Independence Day 2026: राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्रता दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय विरासत की विशेष प्रस्तुति।

Independence Day 2026: राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, स्वतंत्रता दिवस पर होगा विशेष आयोजन, जनजातीय विरासत की होगी विशेष प्रस्तुति

Independence Day 2026/Image Credit: X Handle

Modified Date: August 12, 2026 / 02:18 pm IST
Published Date: August 12, 2026 2:17 pm IST
HIGHLIGHTS
  • राष्ट्रपति भवन में स्वतंत्रता दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय विरासत की विशेष प्रस्तुति
  • गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य के साथ बस्तर की संगीत परंपरा होगी राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित
  • राष्ट्रपति भवन में अलग-अलग राज्यों के 35 कलाकार विभिन्न लोक नृत्यों और पारंपरिक संगीत प्रस्तुतियों में भाग लेंगे।

Independence Day 2026: नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह ‘एट होम’ में विशेष स्थान मिलेगा। भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की जीवंत लोक एवं पारंपरिक कला परंपराओं के माध्यम से संस्कृति, समुदाय और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ की ओर से गेंड़ी और गौर मड़िया नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। हरेली पर्व से जुड़ा गेंड़ी नृत्य ऊंची बांस की गेंड़ियों पर कलाकारों के संतुलन, फुर्ती और कौशल को प्रदर्शित करता है। (Independence Day 2026)  वहीं बस्तर के मड़िया समुदाय से जुड़ा गौर मड़िया नृत्य पारंपरिक वेशभूषा और शिरोभूषण के माध्यम से जनजातीय जीवन, वीरता और प्रकृति के साथ समुदाय के संबंध को अभिव्यक्त करता है।

छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के लगभग 35 कलाकार विभिन्न लोक नृत्यों और पारंपरिक संगीत प्रस्तुतियों में भाग लेंगे। कार्यक्रम में लावणी, तुतारी, सोंगी मुखावटे, गेंड़ी, गौर मड़िया, भगोरिया, बैगा करमा, सामई और घोड़े मोडनी जैसी प्रस्तुतियां शामिल होंगी।

बस्तर की मंगल धुन से शुरू होगी सांगीतिक प्रस्तुति

Independence Day 2026: समारोह की संगीत प्रस्तुति को भारत की विविध लोक परंपराओं की एक सांस्कृतिक यात्रा के रूप में तैयार किया गया है। इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ और बस्तर की पारंपरिक अनुष्ठानिक परंपराओं पर आधारित मंगल धुन से होगी। इसके बाद महाराष्ट्र, गोवा और मध्य प्रदेश की संगीत परंपराओं की प्रस्तुति होगी तथा अंतिम चरण में चारों राज्यों के कलाकार संयुक्त प्रस्तुति देंगे।

संगीत प्रस्तुति का संयोजन छत्तीसगढ़ के लोक गायक, संगीतकार, लेखक एवं रंगकर्मी श्री राकेश कुमार तिवारी ने किया है। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित तिवारी छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के संरक्षण और संवर्धन के लिए जाने जाते हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद और नारायणपुर के कलाकार भी इस प्रस्तुति में भाग लेंगे। (Independence Day 2026) बालोद के कलाकार मोहरी, दफड़ा, दमाऊ, गुड़ुम और बांसुरी जैसे वाद्ययंत्र प्रस्तुत करेंगे, जबकि नारायणपुर के कलाकार गुटा परई, नार परई, ढोल और कुंदिर के माध्यम से बस्तर की पारंपरिक संगीत विरासत को सामने लाएंगे।

बस्तर के शिल्प और छत्तीसगढ़ की पनिका बुनाई भी होगी प्रदर्शित

राष्ट्रपति भवन की सांस्कृतिक प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की विरासत को संगीत और नृत्य से आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक शिल्प एवं वस्त्र परंपराओं के माध्यम से भी प्रदर्शित किया जाएगा। ढोकरा और बस्तर के पारंपरिक लौह शिल्प जैसी कला परंपराएं राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत को दर्शाएंगी।

चारों राज्यों की वस्त्र परंपराओं को भी एक साझा प्रस्तुति में शामिल किया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ की पनिका बुनाई, महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी, गोवा की कुंभी साड़ी और मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई को प्रदर्शित किया जाएगा।

संस्कृति और प्रकृति के संबंध को रेखांकित करेगा समारोह

Independence Day 2026: इस वर्ष की प्रस्तुति का प्रमुख संदेश सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के परस्पर संबंध पर केंद्रित है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली, शिल्प और पवित्र उपवनों के संरक्षण जैसी परंपराएं समुदाय और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती हैं।

इस प्रकार राष्ट्रपति भवन का स्वतंत्रता दिवस स्वागत समारोह छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय कला, बस्तर की संगीत परंपरा, पारंपरिक वाद्ययंत्र, शिल्प और पनिका बुनाई को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करते हुए राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित करेगा।

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