प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने निवर्तमान न्यायाधीश राजेश बिंदल की उपलब्धियों की सराहना की

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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने निवर्तमान न्यायाधीश राजेश बिंदल की उपलब्धियों की सराहना की

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 02:41 PM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 02:41 PM IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने उच्चतम न्यायालय के निवर्तमान न्यायाधीश राजेश बिंदल की उपलब्धियों की बुधवार को सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न्यायाधीश के रूप में न केवल ‘‘निर्णायक की भूमिका’’ निभाई, बल्कि संस्थागत कार्यों का भी निष्ठापूर्वक निर्वहन किया और उनके मुकदमों के निपटारे की दर बेजोड़ रही।

सोलह अप्रैल, 1961 को अंबाला में जन्में न्यायमूर्ति बिंदल ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद 1985 में अपने कानूनी करियर की शुरुआत की और 2006 में वह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए। इसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय, कलकत्ता उच्च न्यायालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित कई उच्च न्यायालयों में सेवाएं दीं, जहां उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी पद संभाले।

वरिष्ठता क्रम में 14वें नंबर पर रहे न्यायमूर्ति बिंदल को 13 फरवरी, 2023 को उच्चतम न्यायालय में पदोन्नत किया गया था और वह 15 अप्रैल, 2026 को तीन साल से अधिक के कार्यकाल के दौरान 100 से अधिक फैसले लिखने के बाद पद छोड़ रहे हैं।

न्यायमूर्ति बिंदल की सेवानिवृत्ति के साथ, शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों के 34 स्वीकृत पदों में से कुल रिक्तियों की संख्या दो हो गई है।

न्यायमूर्ति बिंदल और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की औपचारिक पीठ की अध्यक्षता करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने निवर्तमान न्यायाधीश के साथ अपने वकालत के दिनों से चले आ रहे दशकों पुराने जुड़ाव को याद किया।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ हमने एक साथ काफी समय बिताया है, जैसा कि आपने रिकॉर्ड में देखा है। मुझे मेरे पूर्व पेशेवर जीवन में भी उन्हें बहुत निकट से जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। समय के साथ, हम दोनों अक्सर संबंधी मामलों से जुड़े रहे, और बाद में अधिक विशिष्ट मामलों पर काम किया, जबकि मैं अन्य न्यायक्षेत्रों का कार्य संभाल रहा था… वे निश्चित रूप से अपनी ईमानदारी और परिश्रम के लिए जाने जाते।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें और न्यायमूर्ति बिंदल को इस पक्ष में एक साथ काम करने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति बिंदल ने न केवल ‘‘निर्णायक की भूमिका निभाई, बल्कि एक न्यायाधीश को जो संस्थागत भूमिका निभानी चाहिए, उसे भी निभाया।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ फरवरी 2023 में इस न्यायालय में पदोन्नत होने के बाद से, न्यायमूर्ति बिंदल ने 100 से अधिक फैसले लिखे हैं। इन फैसलों से किसी व्यक्तिगत परिणाम से कहीं अधिक यह पता चलता है कि वह एक ऐसे न्यायाधीश हैं जो व्यवस्थागत मुद्दों में मानवीय पहलू को लगातार प्राथमिकता देने का प्रयास करते हैं।’’

अपने विदाई भाषण में न्यायमूर्ति बिंदल ने न्यायपालिका की जिम्मेदारियों पर विचार रखते हुए एक न्यायाधीश की भूमिका पर एक कठोर लेकिन विनम्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा, ‘‘ कभी-कभी लोग कहते हैं कि उन्होंने वकालत में कड़ी मेहनत की है और अब आराम करने के लिए न्यायाधीश बने हैं। यह आराम करने की जगह नहीं है।’’

उन्होंने देश में लगभग पांच करोड़ मामलों के लंबित होने का जिक्र किया।

न्यायमूर्ति बिंदल ने कहा, ‘‘ पूरी जनता आपकी ओर देख रही है। पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, याचिकाकर्ता अक्सर केवल अपनी बात सुनाना चाहता है। यदि आप धैर्यपूर्वक सुनते हैं तो आपको तथ्य पता चलते हैं और जब तक तथ्य स्पष्ट नहीं होते, कानून लागू नहीं किया जा सकता।’’

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति बिंदल के कार्यकाल से संबंधित एक चौंकाने वाला आंकड़ा उजागर किया।

उन्होंने कहा कि 12 वर्षों की अवधि में न्यायमूर्ति बिंदल ने लगभग 80,000 मामलों का निपटारा किया, यानी प्रति वर्ष औसतन 6,000 मामले।

उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगा था कि यह महज़ एक आंकड़ा है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह एक विशाल कार्यक्षेत्र है।’’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति बिंदल को लेकर कहा कि उनमें ‘‘एक अच्छे मनुष्य की आंखें हैं, लेकिन बेंच को लेकर उनका व्यवहार एक बहुत सख्त न्यायाधीश जैसा है।’’

‘सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन’ के अध्यक्ष विपिन नायर ने भी न्यायमूर्ति बिंदल की उपलब्धियों की सराहना की और उनकी सेवानिवृत्ति पर उन्हें शुभकामनाएं दीं।

भाषा शोभना माधव

माधव