कोलकाता, नौ जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कोलकाता के पास सॉल्ट लेक स्थित राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय स्वास्थ्य भवन का औचक दौरा किया और मरीजों की देखभाल में सुधार के उद्देश्य से शुरू की गई अस्पताल निगरानी प्रणाली की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि सीसीटीवी आधारित निगरानी प्रणाली शहर के 15-16 सरकारी अस्पतालों और कुछ जिलों में पहले से ही लागू है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस सुविधा का विस्तार 30 जुलाई तक सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में भी किया जाए।
अधिकारी ने कहा, ‘मैंने निर्देश दिया है कि लाइव निगरानी प्रणाली का विस्तार 30 जुलाई तक सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में किया जाए। यह निगरानी केवल आपातकालीन वार्ड और ओपीडी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें रसोई, पार्किंग क्षेत्र, उचित मूल्य वाली दवा दुकानें और जनऔषधि केंद्र भी शामिल होंगे ताकि पारदर्शिता, स्वच्छता और मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा सके।’
उन्होंने यह भी कहा कि इससे सरकारी अस्पतालों में दलालों की गतिविधियों पर रोक लगेगी।
निगरानी सुविधा का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने घोषणा की कि दक्षिण कोलकाता स्थित सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में इस साल दुर्गा पूजा से पहले 250 बिस्तर बढ़ाए जाएंगे।
उन्होंने अधिकारियों को अस्पताल की आईसीयू क्षमता को 112 बिस्तरों से बढ़ाकर 200 बिस्तर करने का भी निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल की ‘बर्न यूनिट’ को भी मजबूत करने की बात कही, जिसकी मौजूदा क्षमता केवल 60 बिस्तरों की है।
मुख्यमंत्री ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया और ट्रॉमा सेंटरों की क्षमता बढ़ाने को कहा ताकि वे एक साथ कम से कम 250 मरीजों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करा सकें।
उन्होंने कहा कि बड़ी दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों को देखते हुए ऐसी सुविधा जरूरी है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार ने न्यू टाउन में 2,000 बिस्तरों वाले अंतरराष्ट्रीय स्तर के अस्पताल की स्थापना के लिए अदाणी समूह के साथ समझौता किया है। इसमें 1,000 बिस्तर गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रहेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर बने निजी अस्पतालों ने भी अपनी कुल बिस्तर क्षमता का 10 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए नि:शुल्क आरक्षित करने पर सहमति जताई है।
मुख्यमंत्री ने मरीजों के कल्याण में सुधार के उद्देश्य से कहा कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए तीन समय के भोजन पर प्रतिदिन होने वाले खर्च को 54 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पोषण योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि भी बढ़ाई गई है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अस्पतालों के पास उपलब्ध जमीन पर अतिरिक्त बुनियादी ढांचा विकसित कर मरीजों के परिजनों के ठहरने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया।
अधिकारी ने कहा कि सरकार अस्पताल परिसरों से दलालों की भूमिका खत्म करने की दिशा में काम करेगी। साथ ही सुरक्षा और जवाबदेही बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके परिजनों के लिए अलग-अलग रंग के पहचान पत्र भी शुरू किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त प्रशासनिक सहयोग के साथ दबावमुक्त कार्य वातावरण उपलब्ध कराएगी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुलिस मामलों में कथित असहयोग के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कानून के प्रावधानों के तहत मांगे गए सभी दस्तावेज और सूचनाएं समय पर उपलब्ध कराकर पुलिस को पूरा सहयोग दें।
भाषा तान्या अविनाश
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