मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कर्नाटक में ‘प्रजासेवा अभियान’ शुरू किया

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कर्नाटक में ‘प्रजासेवा अभियान’ शुरू किया

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कर्नाटक में ‘प्रजासेवा अभियान’ शुरू किया
Modified Date: September 5, 2026 / 07:53 pm IST
Published Date: September 5, 2026 7:53 pm IST

विजयनगर (कर्नाटक), पांच सितंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने नागरिकों से सीधे जुड़ने के लिए विजयनगर जिले के कुडलीगी होबली से ‘प्रजासेवा अभियान’ की शनिवार को शुरुआत की।

अधिकारियों ने बताया कि ‘प्रजासेवा अभियान’ एक एकीकृत व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतें सीधे सुनना और उनका समाधान मौके पर या निर्धारित समयसीमा के भीतर करना है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान हाल में गठित प्रजासेवा विभाग के तहत शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को लोगों के द्वार तक पहुंचाना है।

अभियान की शुरुआत करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार की सफलता विज्ञापनों में नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर मुस्कान में झलकती है।

उन्होंने कहा, “हमें आपकी सेवा करने का मौका मिला है… यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। वह समय बीत चुका है जब लोगों को सरकार के पास जाना पड़ता था। अब सरकार लोगों के पास आ रही है। यह कार्यक्रम लोगों के दरवाजे तक शासन को पहुंचाने के लिए शुरू किया गया है।”

शिवकुमार ने कहा कि अधिकारियों को सिर्फ विधान सौध, जिला या तालुक दफ्तरों में बैठकर काम नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें लोगों के पास जाना चाहिए, उनकी समस्याएं सुननी चाहिए और उनका समाधान करना चाहिए।

सांसद जी.सी. चंद्रशेखर द्वारा उन्हें “राज्य का शासक” कहे जाने पर शिवकुमार ने कहा, “मैं राज्य का शासक नहीं हूं। मुझे ‘प्रजा सेवक’ कहा जाना चाहिए। इससे बड़ी खुशी मेरे लिए और कोई नहीं है।”

उन्होंने कहा, “राजाओं का दौर खत्म हो चुका है और लोकतंत्र आ गया है। यह विभाग लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए बनाया गया है। यह सिर्फ एक विभाग नहीं है; हमने लोगों की समस्याओं को सुनने, उन पर प्रतिक्रिया देने और समाधान उपलब्ध कराने का फैसला किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए हर कोई उपायुक्त (डीसी) कार्यालय, मंत्री के कार्यालय या विधान सौध नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकाल के दौरान यह स्थिति बदलनी चाहिए। अधिकारियों को लोगों के पास जाना चाहिए और उनके बीच रहना चाहिए।”

शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने कुडलीगी में उस जगह का दौरा किया जहां महात्मा गांधी की अस्थियां रखी गई हैं और उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गांधी का संदेश था कि प्रशासन को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वह बसवन्ना (12वीं सदी के समाज सुधारक) की धरती पर काम कर रहे हैं। कुडलीगी आने से एक दिन पहले, उन्होंने सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों की समस्याओं को देखने के बाद बसवन्ना की समाधि स्थल का दौरा किया था।

शिवकुमार ने कहा, “मैंने सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा सिर्फ हेलीकॉप्टर से नहीं किया। यात्रा के दौरान मैंने इस इलाके की खेती की जमीनों को भी देखा। लेकिन विपक्ष इसकी आलोचना करता है। हमारा मानना ​​है कि आलोचना तो खत्म हो जाएगी, लेकिन हमारा काम बना रहेगा।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने हर जिले के मंत्री को निर्देश दिया है कि वे हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को अपने-अपने जिले के सभी तालुकों का दौरा करें और लोगों की शिकायतें सुनें।

मुख्यमंत्री ने कहा, “दूसरे चरण में, इसे होबली स्तर तक ले जाया जाना चाहिए। विधायकों को पंचायत स्तर पर जाना चाहिए। अगर विधायक नहीं जाते हैं, तो अधिकारियों को लोगों के पास जाना चाहिए। अधिकारियों को लोगों के बीच रहना चाहिए और उनकी परेशानियों का समाधान करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि भले ही हर समस्या का समाधान करना मुमकिन न हो, लेकिन सरकार कानूनी दायरे में रहते हुए जितना हो सके, समाधान उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने कहा, “पेंशन, भूमि गारंटी, खाता, स्थलों, बेघर लोगों और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान इस विभाग के जरिए किया जाएगा।”

शिवकुमार ने लोगों से उनकी शिकायतें संबंधित पंचायतों में आवेदन के जरिए जमा करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “अधिकारियों ने हमें बताया है कि लगभग 50,000 आवेदन पहले ही जमा किए जा चुके हैं। एक बार जब आप आवेदन जमा कर देते हैं, तो हम उसे भूलेंगे नहीं। सरकार तब तक काम करती रहेगी जब तक कोई समाधान नहीं निकल जाता। अगर इसका समाधान नहीं हो पाता है, तो बताया जाएगा कि ऐसा क्यों नहीं किया जा सका।”

उन्होंने आगे कहा कि जहां कानूनी दखल की जरूरत होगी, वहां लोगों का अदालत में पक्ष रखने के लिए वकील उपलब्ध कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को अपनी गारंटी योजनाओं के लिए खुद प्रधानमंत्री की आलोचना का सामना करना पड़ा था।

मुख्यमंत्री ने कहा, “अब उन आलोचनाओं का क्या हुआ? गारंटी योजनाओं की तरह ही, ‘प्रजा सेवा’ भी कर्नाटक मॉडल के तौर पर सामने आएगी।”

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन


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