China claim to Arunachal : चीन ने फिर किया अरुणाचल पर अपना दावा, भारत ने अभिन्न हिस्सा बताया, भारतीय महिला के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर दुर्व्यवहार के बाद बढ़ा विवाद

Ads

China claim to Arunachal: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, और चीन चाहे जितना भी दावा कर ले, सच्चाई नहीं बदल सकती

  •  
  • Publish Date - November 25, 2025 / 11:41 PM IST,
    Updated On - November 25, 2025 / 11:47 PM IST

China claim to Arunachal, image source: ANI

HIGHLIGHTS
  • पेम वांगजॉम विवाद: क्या हुआ था?
  • जबरन रोके जाने का आरोप
  • चीन अरुणाचल पर दावा क्यों करता है?
  • चीन द्वारा जगहों के नाम बदलने की कोशिशें

बीजिंग: China claim to Arunachal, चीन ने एक बार फिर अरुणाचल प्रदेश पर दावा जताया है। मंगलवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जांगनान (चीन द्वारा अरुणाचल का दिया गया नाम) चीन का हिस्सा है तथा भारत द्वारा उस पर “अवैध कब्जा” किया गया है, जिसे चीन मान्यता नहीं देता। यह बयान उस सवाल के जवाब में आया जिसमें ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय महिला पेम वांगजॉम थांगडॉक के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर हुए कथित दुर्व्यवहार पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी। चीन ने पेम के आरोपों को भी खारिज कर दिया।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, और चीन चाहे जितना भी दावा कर ले, सच्चाई नहीं बदल सकती। उन्होंने यह भी बताया कि पेम की हिरासत जैसी स्थिति पर भारत ने चीन से कड़े शब्दों में आपत्ति जताई है।

पेम वांगजॉम विवाद: क्या हुआ था?

China claim to Arunachal, पेम ने आरोप लगाया कि चीन के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को अवैध बताया, क्योंकि उसमें जन्मस्थान “अरुणाचल प्रदेश” लिखा था। वे 21 नवंबर को लंदन से जापान जा रही थीं और शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर उनका 3 घंटे का ट्रांजिट था।

जबरन रोके जाने का आरोप

पेम का कहना है कि उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और वीजा होने के बावजूद उन्हें अगली फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट स्टाफ ने उनका मजाक उड़ाया, तंज कसे और बार–बार चीनी पासपोर्ट बनवाने की सलाह जैसे टिप्पणी की। 3 घंटे का ट्रांजिट उनके लिए 18 घंटे की परेशानी बन गया। इस दौरान उन्हें पर्याप्त जानकारी, भोजन या एयरपोर्ट सुविधाएं भी नहीं दी गईं।

भारतीय दूतावास की मदद से मिली राहत

ट्रांजिट जोन में फंसे होने के कारण पेम टिकट या खाना नहीं खरीद पा रही थीं। उन्होंने दावा किया कि अधिकारी उन्हें बार–बार चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस की टिकट खरीदने के लिए मजबूर करते रहे और पासपोर्ट लौटाने की शर्त भी यही बताई। आखिरकार ब्रिटेन में एक मित्र के जरिए उन्होंने भारत के दूतावास से संपर्क किया। भारतीय अधिकारियों की मदद से वे देर रात की फ्लाइट से शंघाई से निकल पाईं।

चीन अरुणाचल पर दावा क्यों करता है?

चीन अरुणाचल को “दक्षिणी तिब्बत” का हिस्सा बताता है और भारत पर तिब्बती क्षेत्र अधिग्रहण का आरोप लगाता है। चीन की खास नजर तवांग जिले पर रहती है, जिसकी सीमा तिब्बत और भूटान से लगती है तथा जो रणनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

चीन द्वारा जगहों के नाम बदलने की कोशिशें

चीन लगातार अरुणाचल की जगहों के नाम बदलता रहा है, ताकि अपने दावे को मजबूत दिखा सके। हाल के कदमों की बात करें तो मई 2024 में 27 जगहों के नाम बदले 2023 में G-20 बैठक से पहले 11 नाम बदले, 2021 में 15 नाम और इसके पहले 2017 में 6 जगहों के नाम बदले गए। चीन नामों की सूची तिब्बती, चीनी और रोमन लिपि में जारी करता है। भारतीय विदेश मंत्रालय इन कदमों को निरर्थक और मूर्खतापूर्ण बताता रहा है।

इन्हे भी पढ़ें:

 

चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावा क्यों करता है?

चीन अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिणी तिब्बत” बताता है। उसका कहना है कि यह ऐतिहासिक रूप से तिब्बत का हिस्सा रहा है, इसलिए इसे चीन का हिस्सा होना चाहिए। भारत इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है।

भारत की अरुणाचल पर क्या स्थिति है?

भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत बार-बार कह चुका है कि चीन के नाम बदलने या दावों से भू-राजनीतिक सच्चाई नहीं बदलती।

पेम वांगजॉम के साथ शंघाई एयरपोर्ट पर क्या हुआ?

ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय नागरिक पेम वांगजॉम थांगडॉक का आरोप है कि चीनी इमिग्रेशन ने उनका पासपोर्ट ‘अवैध’ बताया (क्योंकि उसमें जन्मस्थान अरुणाचल लिखा था), उन्हें 18 घंटे रोके रखा, और फ्लाइट में चढ़ने नहीं दिया।

क्या चीन ने पेम के साथ बदसलूकी की बात मानी?

नहीं। चीन का कहना है कि न तो उन्हें रोका गया और न ही कोई दुर्व्यवहार हुआ। चीन का दावा है कि एयरलाइन ने उन्हें भोजन और आराम की सुविधा दी।