चिंतपूर्णी मंदिर: ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित

चिंतपूर्णी मंदिर: ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित

चिंतपूर्णी मंदिर: ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित
Modified Date: July 31, 2026 / 11:44 am IST
Published Date: July 31, 2026 11:44 am IST

ऊना (हिमाचल प्रदेश), 31 जुलाई (भाषा) ऊना जिले में स्थित प्रसिद्ध चिंतपूर्णी मंदिर की ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में अनियमितताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

‘सुगम दर्शन’ मंदिर में दर्शन के लिए त्वरित और आसान प्रवेश प्रदान करने के उद्देश्य से आठ अगस्त 2023 को शुरू की गई एक सशुल्क व्यवस्था है जिसके तहत विशेष सेवा शुल्क, समिति समूह और यात्रा सहायता की सुविधाएं दी जाती हैं।

व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने 19 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की, जिसके बाद ये अनियमितताएं उजागर हुईं।

जांच में खुलासा हुआ कि उस दिन केवल 23 आवेदन हुए थे, जबकि प्रणाली में 88 आवेदन दर्ज दिखाई दे रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा ‘लॉगिन आईडी’ और पासवर्ड के दुरुपयोग के कारण ये अतिरिक्त प्रविष्टियां दर्ज हुईं।

अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मामले की जांच के लिए मंदिर के न्यास ने ऊना के अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है और ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था का संचालन करने वाले पुराने कर्मचारियों की जगह नयी टीम तैनात कर दी है।

समिति को तथ्यों का सत्यापन करने, जवाबदेही तय करने और आवश्यक सिफारिशों के साथ सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

माता चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के सहायक आयुक्त एवं अंब के एसडीएम पारस अग्रवाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ‘सुगम दर्शन’ व्यवस्था में तकनीकी सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

अग्रवाल ने बताया कि अगस्त 2023 में इस व्यवस्था की शुरुआत से लेकर अब तक इसके माध्यम से 12 करोड़ रुपये से अधिक का सेवा शुल्क एकत्र किया गया है, जिसका उपयोग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विकास और जन कल्याणकारी पहलों में किया जा रहा है।

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘सुगम दर्शन’ पास के लिए लिया जाने वाला शुल्क मंदिर का दान या चढ़ावा नहीं है, बल्कि यह सुविधा प्रदान करने के लिए निर्धारित एक सेवा शुल्क है। मंदिर के चढ़ावे के लिए अलग खाते रखे जाते हैं, जो सेवा शुल्क से बिल्कुल अलग हैं।

भाषा खारी रंजन

रंजन


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