तिरुवनंतपुरम, 20 अप्रैल (भाषा) केरल के राजस्व मंत्री के. राजन ने सोमवार को कहा कि भूस्खलन पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वायनाड टाउनशिप परियोजना के तहत बनाए गए मकानों में कथित दरारों संबंधी मीडिया में प्रसारित खबरें भ्रामक हैं और ये गुणवत्ता जांच प्रक्रिया से जुड़ी गलतफहमी पर आधारित हैं।
मंत्री ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्होंने खबरों की पुष्टि के लिए स्वयं स्थल का दौरा किया और पाया कि जिन्हें ‘‘दरारें’’ बताया जा रहा था, वे दरअसल निरीक्षण के दौरान इंजीनियरों द्वारा बनाए गए पेंसिल के निशान थे।
उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के तहत जलभराव परीक्षण की योजना पहले से ही बनाई गई थी।
राजन ने कहा, ‘‘दो मकानों में छत पर 24 घंटे तक पानी रोककर जांच की गई और इस दौरान हल्की नमी पाई गई। इंजीनियरों ने उन जगहों पर निशान लगाए थे जिन्हें बाद में मीडिया में प्रसारित दृश्यों में दरार समझ लिया गया।’’
उन्होंने कहा कि इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मकान मौसम संबंधी सभी स्थितियों का सामना कर सकें।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं रिसाव मिलता है तो उसे रोकने के लिए ‘एपॉक्सी’ से मरम्मत की जाती है और इसके बाद दोबारा जांच एवं जलरोधक उपाय किए जाते हैं।
मंत्री ने हाल में निरीक्षण के दौरान उनके एक ढांचे पर चढ़ने को लेकर हुई आलोचना पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने राज्य की गरिमा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
उन्होंने कहा कि मकानों को लाभार्थियों को सौंपने से पहले संयुक्त सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद किसी भी प्रकार की समस्या को दूर करने के लिए पांच साल की वारंटी भी दी जाएगी।
राजन ने कहा कि वायनाड के मुंडक्कई-चूरलमाला क्षेत्रों में भूस्खलन की त्रासदी हुए 21 महीने बीत जाने के बावजूद किराये, दैनिक भत्ते और भोजन सहायता के लिए दी जाने वाली वित्तीय मदद में कोई बाधा नहीं आई है।
मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास जल्द से जल्द सुनिश्चित किए जाएंगे।
भाषा सिम्मी नरेश
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